माता-पिता बनने की चाह में कई दंपती इन दिनों इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) का सहारा लेते हैं। हालांकि, हर बार पहली कोशिश में सफलता मिलना संभव नहीं होता। कुछ मामलों में गर्भधारण के लिए एक से अधिक आईवीएफ साइकिल की जरूरत पड़ सकती है। इसकी वजह महिला की उम्र, अंडों की संख्या और गुणवत्ता, ओवेरियन रिजर्व तथा पुरुष के शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता हो सकती है।
फर्टिलिटी विशेषज्ञों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में अंडों की संख्या और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। खासकर 35 वर्ष के बाद प्रजनन क्षमता में गिरावट अधिक देखी जाती है। वहीं, कम ओवेरियन रिजर्व के कारण एक साइकिल में पर्याप्त अंडे नहीं मिल पाते। कई बार अंडों के निषेचन के बाद भी सभी भ्रूण गर्भाशय में स्थानांतरण के योग्य नहीं बन पाते। ऐसे में अगली साइकिल की जरूरत पड़ सकती है।
पहली कोशिश असफल होने का मतलब यह नहीं है कि आगे गर्भधारण संभव नहीं है। डॉक्टर पिछले उपचार के परिणामों की समीक्षा कर दवाओं की खुराक या ओवेरियन स्टिमुलेशन की रणनीति में बदलाव कर सकते हैं। हर असफल प्रयास के बाद महंगी जांच कराना भी जरूरी नहीं होता; अगला कदम मेडिकल स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
आईवीएफ शुरू करने से पहले महिला की हार्मोन प्रोफाइल, एएमएच जांच, अल्ट्रासाउंड और जरूरत के अनुसार गर्भाशय की जांच करानी चाहिए। पुरुष साथी का सीमेन एनालिसिस भी जरूरी है। दोनों पार्टनर को संतुलित खानपान, फल-सब्जियों और पर्याप्त प्रोटीन पर ध्यान देना चाहिए। स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित व्यायाम करना और धूम्रपान व शराब से बचना भी बेहतर तैयारी का हिस्सा है। उपचार शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से पूरी मेडिकल स्थिति और सफलता की वास्तविक संभावनाओं पर चर्चा करना जरूरी है।
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