सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: तनाव और नींद की कमी से बढ़ सकता है मिर्गी के दौरे का खतरा
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और नींद की कमी आम समस्याएं बन गई हैं। लेकिन जिन लोगों को मिर्गी (एपिलेप्सी) की बीमारी है, उनके लिए ये स्थितियां परेशानी बढ़ा सकती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक मानसिक तनाव और पर्याप्त नींद नहीं लेना कुछ मरीजों में मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर सकता है। हालांकि, ये कारक अपने आप मिर्गी की बीमारी पैदा नहीं करते, बल्कि पहले से संवेदनशील लोगों में दौरे की आशंका बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, नींद के दौरान मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों में बदलाव होता है। जब व्यक्ति लगातार कम सोता है या उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो मस्तिष्क की गतिविधियों का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इससे मिर्गी से पीड़ित कुछ लोगों में दौरे पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन और नींद का चक्र प्रभावित हो सकता है, जो दौरे का कारण बन सकता है।
हर मरीज में दौरे के कारण और ट्रिगर अलग-अलग हो सकते हैं। किसी व्यक्ति को तनाव से परेशानी हो सकती है, जबकि दूसरे में नींद की कमी या दवा की खुराक छूटना प्रमुख वजह हो सकती है।
डॉक्टरों की सलाह है कि मिर्गी के मरीज नियमित समय पर सोएं, पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान तथा हल्का व्यायाम अपनाएं। डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएं समय पर लेना भी बेहद जरूरी है। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद करना या उसकी खुराक बदलना खतरनाक हो सकता है। दौरे कब और किन परिस्थितियों में पड़ते हैं, इसका रिकॉर्ड रखने से संभावित कारणों की पहचान में मदद मिलती है।
यदि किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़े, दौरा पांच मिनट से अधिक चले या लगातार दौरे आएं और बीच में होश न लौटे, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
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