सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: अस्पतालों में जानलेवा संक्रमण का खतरा, 30 दिन में 77% मरीजों की मौत
अस्पतालों में भर्ती मरीज इलाज के जरिए स्वस्थ होने की उम्मीद करते हैं, लेकिन अस्पताल में फैलने वाले संक्रमण कई बार उनकी जान के लिए गंभीर खतरा बन जाते हैं। कर्नाटक के एक निजी अस्पताल में की गई स्टडी में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बैक्टीरिया के संक्रमण से जुड़ा चिंताजनक मामला सामने आया है। जुलाई 2021 से दिसंबर 2023 के बीच किए गए अध्ययन में 154 मरीजों के खून में एसिनेटोबैक्टर बाउमानी बैक्टीरिया पाया गया। इनमें से 118 मरीजों यानी करीब 76.6 प्रतिशत की संक्रमण मिलने के 30 दिनों के भीतर मौत हो गई।
पहले सात दिनों में भी बड़ी संख्या में मौतें अध्ययन के अनुसार, करीब 57.1 प्रतिशत मरीजों की मौत संक्रमण के शुरुआती सात दिनों के भीतर हो गई। यह बैक्टीरिया विशेष रूप से गंभीर रूप से बीमार और आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसके कुछ प्रकार कई एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होते हैं, जिससे संक्रमण का इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
फेफड़ों और कैथेटर से जुड़ा संक्रमण रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 51 प्रतिशत मरीजों में बैक्टीरिया फेफड़ों के संक्रमण के माध्यम से खून तक पहुंचा, जबकि करीब 29 प्रतिशत मामलों में नस में लगी कैथेटर नली से संक्रमण जुड़ा पाया गया। कैथेटर का इस्तेमाल मरीजों को दवाएं और तरल पदार्थ देने के लिए किया जाता है।
संक्रमण रोकने के लिए जरूरी हैं सख्त उपाय अस्पतालों में हाथों की स्वच्छता, उपकरणों की नियमित सफाई, कैथेटर और अन्य मेडिकल उपकरणों का सुरक्षित इस्तेमाल तथा संक्रमण की समय पर पहचान बेहद जरूरी है। एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग भी जांच और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर होना चाहिए।
यह अध्ययन एक निजी अस्पताल के 154 मरीजों पर आधारित है। इसलिए इसके आंकड़ों को देश के सभी अस्पतालों या सभी संक्रमणग्रस्त मरीजों पर लागू नहीं किया जा सकता। फिर भी यह अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की सुरक्षा के मजबूत इंतजामों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
Hashtags: #Health #Bhopal #अस्पतालों #जानलेवा #संक्रमण #खतरा #दिन #मरीजों #मौत #अस्पतालोंमेंजानलेवासंक्रमण