सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) आज कई महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याओं का कारण बन रहा है। इस स्थिति में हार्मोनल असंतुलन और अनियमित ओव्यूलेशन के चलते गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। ऐसे में संतुलित जीवनशैली, नियमित व्यायाम और योग स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि जीवनशैली में बदलाव हर महिला के लिए आईवीएफ का विकल्प नहीं है।

योग और व्यायाम से मिल सकती है मदद पीसीओएस से प्रभावित महिलाओं के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि उपयोगी मानी जाती है। योग, पैदल चलना, हल्का व्यायाम और अन्य गतिविधियां तनाव कम करने, नींद बेहतर बनाने तथा वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती हैं। कुछ महिलाओं में वजन और इंसुलिन प्रतिरोध में सुधार से मासिक चक्र तथा ओव्यूलेशन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

खानपान पर दें विशेष ध्यान विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित आहार भी पीसीओएस के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाता है। भोजन में साबुत अनाज, दालें, हरी सब्जियां, फल, प्रोटीन और फाइबर शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों और प्रसंस्कृत भोजन का सेवन सीमित रखना बेहतर है। पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन भी स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

आईवीएफ से पहले सही जांच जरूरी पीसीओएस होने का अर्थ यह नहीं कि महिला को गर्भधारण के लिए अनिवार्य रूप से आईवीएफ की जरूरत पड़ेगी। कई मामलों में चिकित्सकीय परामर्श और उपयुक्त उपचार से ओव्यूलेशन में मदद मिल सकती है। वहीं, कुछ स्थितियों में अन्य प्रजनन उपचार या आईवीएफ की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए केवल योग या घरेलू उपायों के भरोसे उपचार टालना उचित नहीं है। गर्भधारण में परेशानी होने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से जांच और सलाह लेना जरूरी है।


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