सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल : नई दिल्ली। लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन के पाचन, पोषक तत्वों के प्रसंस्करण और शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन लिवर से जुड़ी कई बीमारियां शुरुआती दौर में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखातीं। ऐसे में मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह पर लिवर की जांच करानी चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक, समय रहते बीमारी का पता चलने से उपचार और जीवनशैली में बदलाव के जरिए गंभीर नुकसान का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
किन लोगों को लिवर की जांच करानी चाहिए? गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में लिवर प्रत्यारोपण विभाग के वरिष्ठ निदेशक डॉ. प्रशांत विलास भंगुई के अनुसार, मोटापा, डायबिटीज, अधिक शराब का सेवन और हेपेटाइटिस बी या सी का पुराना संक्रमण लिवर की बीमारी का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इन स्थितियों में लिवर में वसा जमा होने, सूजन और धीरे-धीरे फाइब्रोसिस यानी लिवर के ऊतकों पर निशान पड़ने की आशंका रहती है। विशेष रूप से मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर और खून में वसा का असामान्य स्तर भी जोखिम का आकलन करते समय महत्वपूर्ण होते हैं। लिवर की कौन-कौन सी जांच होती हैं? लिवर की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षणों, पुरानी बीमारियों और अन्य जोखिमों के आधार पर अलग-अलग जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
लिवर फंक्शन टेस्ट: खून के नमूने से लिवर एंजाइम और अन्य संकेतकों की जांच की जाती है।
हेपेटाइटिस की जांच: जरूरत के अनुसार हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण का पता लगाया जाता है।
अल्ट्रासाउंड: लिवर में वसा जमा होने सहित कुछ संरचनात्मक बदलावों की पहचान में मदद मिलती है।
फाइब्रोसिस की जांच: फाइब्रोस्कैन या अन्य गैर-आक्रामक जांच से लिवर में निशान पड़ने और ऊतकों की कठोरता का आकलन किया जा सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि लिवर एंजाइम की रिपोर्ट सामान्य होने पर भी लिवर की बीमारी पूरी तरह खारिज नहीं होती। इसलिए जांच का चुनाव डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए। लक्षणों का इंतजार करना पड़ सकता है भारी लिवर की बीमारी शुरुआती चरण में बिना स्पष्ट संकेतों के बढ़ सकती है। पीलिया, पेट में सूजन या पानी भरना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण सामने आने तक बीमारी गंभीर हो सकती है। हालांकि, इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं और केवल इनके आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित भोजन लेना और शराब से बचना लिवर की सेहत के लिए उपयोगी कदम हैं। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। जोखिम वाले लोगों को नियमित चिकित्सकीय सलाह लेकर जांच की योजना बनानी चाहिए।
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