सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। सांस फूलने की समस्या को अक्सर थकान, कमजोरी या सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन बार-बार या अचानक सांस लेने में परेशानी होना दिल अथवा फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लक्षणों के आधार पर कुछ संकेतों को समझा जा सकता है, लेकिन सही कारण की पुष्टि चिकित्सकीय जांच से ही होती है। फेफड़ों की बीमारी में दिख सकते हैं ये लक्षण फेफड़े शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करते हैं। संक्रमण या सांस संबंधी बीमारी होने पर यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। फेफड़ों की समस्या में आमतौर पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं लगातार खांसी या बलगम आना। सांस लेते या छोड़ते समय घरघराहट होना। बुखार के साथ सांस फूलना। सीने में जकड़न या गहरी सांस लेने पर दर्द होना। ये लक्षण निमोनिया, अस्थमा, सीओपीडी या अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं में हो सकते हैं। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती।
हार्ट की बीमारी में कैसे फूलती है सांस? जब दिल प्रभावी ढंग से खून पंप नहीं कर पाता, तो कुछ स्थितियों में फेफड़ों में तरल जमा होने लगता है। इससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। हृदय संबंधी समस्या की आशंका तब बढ़ सकती है, जब थोड़ा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर ही सांस फूलने लगे। लेटने पर सांस लेने में परेशानी हो और बैठने पर राहत मिले। रात में नींद से जागकर सांस लेने में दिक्कत हो। पैरों या टखनों में सूजन दिखाई दे। सांस फूलने के साथ सीने में दबाव, असामान्य थकान या तेज धड़कन महसूस हो। इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, पैरों में सूजन या सांस फूलने के अन्य कारण भी हो सकते हैं। किन जांचों से पता चलता है सही कारण? डॉक्टर मरीज के लक्षण, उनकी अवधि, शारीरिक जांच और मेडिकल इतिहास के आधार पर जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। फेफड़ों के लिए: छाती का एक्स-रे, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट और जरूरत पड़ने पर अन्य जांचें।दिल के लिए: ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी और लक्षणों के अनुसार खून की जांच या अन्य परीक्षण। कई बार दिल और फेफड़ों की बीमारियों के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। इसलिए खुद से बीमारी का अनुमान लगाकर दवा लेना उचित नहीं है।सांस फूलने पर कब लें तुरंत मदद? यदि सांस अचानक बहुत ज्यादा फूलने लगे, बोलने में परेशानी हो, सीने में दर्द या भारीपन महसूस हो, होंठ नीले पड़ने लगें अथवा बेहोशी जैसी स्थिति बने, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। नई या लगातार बनी रहने वाली सांस की परेशानी में भी जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। निष्कर्ष: सांस फूलना केवल फेफड़ों के संक्रमण का लक्षण नहीं है। यह दिल, फेफड़ों या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
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