सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बिना पेट दर्द के भी खराब हो सकता है लिवर, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन के पाचन, पोषक तत्वों के प्रसंस्करण, ऊर्जा के भंडारण और शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। आमतौर पर लोग लिवर की बीमारी को पेट दर्द से जोड़कर देखते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, लिवर में परेशानी होने पर हमेशा पेट में दर्द हो, यह जरूरी नहीं है। खासकर फैटी लिवर की शुरुआती अवस्था में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते।
शरीर के दूसरे हिस्सों में दिख सकते हैं संकेत लिवर से जुड़ी कुछ बीमारियों में शरीर के दूसरे हिस्सों में भी बदलाव दिखाई दे सकते हैं। लगातार थकान, कमजोरी और काम करने की क्षमता में कमी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। हालांकि, इन संकेतों के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। लिवर की बीमारी बढ़ने पर कुछ लोगों में आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, पैरों या टखनों में सूजन, पेट में पानी जमा होना और त्वचा पर खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आसानी से चोट लगना या खून बहना भी गंभीर लिवर समस्या का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों को केवल फैटी लिवर का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
फैटी लिवर का खतरा किन लोगों को ज्यादा? फैटी लिवर में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके जोखिम से जुड़े कारक हैं। शराब का सेवन भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। समय के साथ कुछ मरीजों में लिवर में सूजन और घाव यानी फाइब्रोसिस विकसित हो सकता है। गंभीर स्थिति में यह सिरोसिस जैसी बीमारी का कारण बन सकता है। हालांकि, हर फैटी लिवर मरीज में बीमारी इस स्तर तक नहीं पहुंचती।
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, वजन को नियंत्रित रखें और मीठे पेय तथा अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें। शराब से बचना लिवर की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं या हर्बल सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल भी न करें।
यदि लगातार थकान, पीलिया, सूजन या पेट में असामान्य बढ़ोतरी जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से संपर्क करें। जोखिम वाले लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए। लिवर की बीमारी का पता केवल लक्षणों से नहीं लगाया जा सकता; सही जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
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