सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस | आईटीडीसी न्यूज़, भोपाल: दिनभर की थकान के बाद भी अगर रात में नींद नहीं आती और बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं, तो इसकी वजह तनाव, अनियमित दिनचर्या, कैफीन का सेवन या सोने के माहौल से जुड़ी समस्या हो सकती है। बार-बार नींद खुलना और सुबह उठने पर थकान महसूस होना भी खराब नींद के संकेत हैं। अच्छी नींद शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।
1. रोज एक ही समय पर सोएं और जागें शरीर की जैविक घड़ी नियमित दिनचर्या से बेहतर तरीके से काम करती है। छुट्टी के दिनों में भी सोने और जागने का समय बहुत ज्यादा न बदलें।
2. सोने से पहले मोबाइल से बनाएं दूरी मोबाइल, टीवी और लैपटॉप का इस्तेमाल सोने से ठीक पहले कम करें। इसकी जगह किताब पढ़ना, धीमा संगीत सुनना या कुछ देर ध्यान करना मददगार हो सकता है।
3. चाय-कॉफी का समय बदलें चाय, कॉफी और कैफीन वाले पेय शाम के बाद लेने से कुछ लोगों की नींद प्रभावित हो सकती है। सोने के करीब भारी भोजन और शराब से भी बचें।
4. बेडरूम को बनाएं आरामदायक कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक तापमान पर रखें। बिस्तर पर काम करने या लंबे समय तक मोबाइल चलाने की आदत से बचें।
5. दिन में करें शारीरिक गतिविधि नियमित टहलना और व्यायाम नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है। हालांकि, सोने से ठीक पहले बहुत तेज व्यायाम कुछ लोगों की नींद में बाधा डाल सकता है। कितनी नींद जरूरी है? 18 से 60 वर्ष के अधिकांश वयस्कों को हर रात कम से कम सात घंटे की नींद की जरूरत होती है। हालांकि, केवल घंटों की संख्या नहीं, बल्कि नींद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें? यदि कई सप्ताह तक नींद की समस्या बनी रहे, दिन में अत्यधिक नींद आए या कामकाज प्रभावित होने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लें। तेज खर्राटे, सोते समय सांस रुकने या हांफकर जागने जैसे लक्षण भी जांच की जरूरत दर्शा सकते हैं। लगातार अनिद्रा में डॉक्टर व्यवहार-आधारित उपचार, जैसे कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी फॉर इंसोम्निया (CBT-I), की सलाह दे सकते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के नींद की गोलियां लेना उचित नहीं है।
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