सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : तेल के धुएं से भी फेफड़ों को खतरा, महिलाओं को विशेष सावधानी जरूरी
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस | आईटीडीसी न्यूज़, भोपाल :भोपाल। फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण धूम्रपान है, लेकिन इसके अलावा भी कुछ ऐसे कारक हैं जिन पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। खाना पकाते समय तेल से निकलने वाला धुआं, तेज आंच पर बार-बार तलना और बंद रसोई में लंबे समय तक काम करना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। शोध में खाना पकाने के धुएं और फेफड़ों के कैंसर के बीच संबंध पाया गया है, खासकर उन महिलाओं में जो लंबे समय तक रसोई में काम करती हैं और धूम्रपान नहीं करतीं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि तेल का सामान्य छोंका लगाने से ही कैंसर हो जाएगा।
1. तेल गर्म होने पर क्या निकलता है?
तेल को बहुत अधिक तापमान पर गर्म करने, धुआं उठने तक पकाने या लगातार तलने से हवा में सूक्ष्म कण और कई रासायनिक पदार्थ फैल सकते हैं। इनका बार-बार और लंबे समय तक सांस के जरिए शरीर में पहुंचना श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। रसोई में उचित वेंटिलेशन न होने पर इन प्रदूषकों का संपर्क बढ़ सकता है।
2. महिलाओं में जोखिम पर क्यों है चिंता?
कई घरों में महिलाएं रोजाना कई घंटे खाना बनाती हैं। यदि रसोई में धुआं बाहर निकलने की व्यवस्था नहीं है या खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयला जैसे प्रदूषणकारी ईंधन इस्तेमाल किए जाते हैं, तो उनका संपर्क अधिक हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, घरेलू वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों से जुड़ा है और इसका बोझ महिलाओं पर असमान रूप से पड़ता है।
3. जोखिम कम करने के लिए अपनाएं ये उपाय
खाना बनाते समय एग्जॉस्ट फैन या चिमनी का इस्तेमाल करें और हवा बाहर निकलने की व्यवस्था रखें।
तेल को धुआं निकलने तक गर्म न करें।
तेज आंच पर लगातार तलने के बजाय तापमान नियंत्रित रखें।
संभव हो तो स्वच्छ ईंधन और कम धुआं पैदा करने वाले उपकरणों का उपयोग करें।
रसोई में उचित हवा की आवाजाही सुनिश्चित करें।
सिगरेट और दूसरे लोगों के तंबाकू के धुएं से भी दूर रहें।
4. किन लक्षणों पर डॉक्टर से मिलें?
लगातार खांसी, खांसी में खून, सांस फूलना, सीने में दर्द, आवाज में बदलाव या बिना कारण वजन घटना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। ये लक्षण कई अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं, लेकिन लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
निष्कर्ष: फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम करने के लिए तंबाकू से दूरी के साथ-साथ स्वच्छ हवा और सुरक्षित रसोई भी महत्वपूर्ण हैं। सबसे जरूरी है कि खाना पकाते समय धुएं का लंबे समय तक संपर्क कम किया जाए।
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