सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : Gen Z की जिंदगी से घट रही खुशी, अमेरिका की स्टडी में डिप्रेशन को लेकर चिंता

सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़, भोपाल नई दिल्ली। बेहतर शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं और करियर के बढ़ते विकल्पों के बावजूद युवा पीढ़ी मानसिक स्वास्थ्य और जीवन संतुष्टि से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका में गैलप के 2026 के सर्वेक्षण में सामने आया है कि जेनरेशन Z यानी 18 से 29 वर्ष के युवाओं में अपनी जिंदगी को लेकर संतुष्टि का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में काफी घटा है। सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 44 प्रतिशत युवा जीवन में अच्छा प्रदर्शन करने और भविष्य को लेकर सकारात्मक स्थिति में होने की श्रेणी में आते हैं। वर्ष 2010 में यह आंकड़ा 64 प्रतिशत था।

डिप्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी गैलप के आंकड़ों के अनुसार, 18 से 29 वर्ष के युवाओं में वर्तमान में डिप्रेशन से पीड़ित होने या उसके उपचार से जुड़े होने की दर 27 प्रतिशत दर्ज की गई। वर्ष 2019 के मुकाबले इसमें 11 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते दबाव की ओर संकेत करता है। सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि केवल 47 प्रतिशत युवाओं ने अपने जीवनसाथी, पार्टनर या करीबी दोस्त के साथ अपने रिश्ते को पहले से अधिक मजबूत बताया। वर्ष 2019 में यह अनुपात 65 प्रतिशत था। वहीं, बीते दिन खुशी महसूस करने वाले युवाओं का अनुपात घटकर 64 प्रतिशत रह गया।

आर्थिक दबाव और भविष्य की चिंता विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान सामाजिक दूरी, अकेलापन, महंगे आवास, आर्थिक असुरक्षा और रोजगार को लेकर अनिश्चितता युवाओं के जीवन पर असर डाल सकती है। सोशल मीडिया पर दूसरों की उपलब्धियों से अपनी तुलना करना भी कुछ युवाओं के तनाव को बढ़ा सकता है। हालांकि, सर्वेक्षण इन कारकों के बीच संबंध दिखाता है, लेकिन किसी एक कारण को गिरती जीवन संतुष्टि के लिए जिम्मेदार साबित नहीं करता बुजुर्गों में तस्वीर अलग सर्वेक्षण में 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के अमेरिकी नागरिकों में जीवन संतुष्टि का स्तर बेहतर पाया गया। 2026 में इस आयु वर्ग के 53 प्रतिशत लोगों को जीवन में बेहतर स्थिति में माना गया, जबकि 2008 में यह आंकड़ा 38 प्रतिशत था।

गैलप का यह अध्ययन अमेरिका के वयस्कों पर आधारित है। इसके निष्कर्षों को सीधे भारत या दुनिया के सभी युवाओं पर लागू नहीं किया जा सकता। फिर भी, यह रिपोर्ट युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक संबंधों और आर्थिक सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित करती है।


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