सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मुंबई में मासूम की मौत से सवाल, बच्चे क्यों होते हैं हिंसक?
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस | आईटीडीसी न्यूज़, भोपाल :मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के गोरेगांव इलाके में 18 महीने की बच्ची की मौत के मामले ने बच्चों में बढ़ती आक्रामकता और हिंसक व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के मुताबिक, 14 अक्टूबर को बच्ची की इमारत की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें कथित तौर पर पड़ोस में रहने वाली 10 वर्षीय लड़की बच्ची को लिफ्ट के पास बने डक्ट में गिराते हुए दिखाई दी। पुलिस ने लड़की के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। हालांकि, मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
छोटी उम्र में बच्चे क्यों हो सकते हैं हिंसक? विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के हिंसक व्यवहार के पीछे कोई एक कारण नहीं होता। घर में झगड़े, शारीरिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार, स्कूल में बुलिंग, उपेक्षा, अत्यधिक तनाव और हिंसक सामग्री के संपर्क जैसे कई कारक बच्चे के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ बच्चों को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने और गुस्से को सही तरीके से व्यक्त करने में कठिनाई होती है।
किन संकेतों को नजरअंदाज न करें? बार-बार अत्यधिक गुस्सा आना, दूसरों को चोट पहुंचाने की धमकी देना, जानवरों के प्रति क्रूरता दिखाना, छोटी बात पर हिंसक प्रतिक्रिया देना या आक्रामक व्यवहार का लगातार बढ़ना चिंता के संकेत हो सकते हैं। हालांकि, केवल एक व्यवहार के आधार पर किसी बच्चे को मानसिक बीमारी से ग्रस्त नहीं माना जा सकता।
समय पर मदद जरूरी माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में अचानक आए बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। बच्चे से शांतिपूर्वक बात करना, उसकी परेशानी समझना और घर में सुरक्षित माहौल देना जरूरी है। यदि बच्चा बार-बार खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे, तो बाल मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर पहचान और उचित सहायता से व्यवहार संबंधी समस्याओं को संभालने में मदद मिल सकती है।
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