सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : LFT रिपोर्ट नॉर्मल होने पर भी खराब हो सकता है लिवर, डॉक्टर ने बताए खतरे के संकेत

नई दिल्ली। लिवर की सेहत जांचने के लिए डॉक्टर अक्सर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) कराने की सलाह देते हैं। इस ब्लड टेस्ट में ALT (SGPT), AST (SGOT), बिलीरुबिन और अन्य मानकों की जांच की जाती है। आमतौर पर रिपोर्ट सामान्य आने पर लोग मान लेते हैं कि उनका लिवर पूरी तरह स्वस्थ है। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य LFT रिपोर्ट होने के बावजूद लिवर की कुछ बीमारियां मौजूद हो सकती हैं। इसलिए केवल ब्लड टेस्ट के आधार पर लिवर की सेहत का अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। फैटी लिवर में सामान्य रह सकता है SGPT फैटी लिवर की समस्या में लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है। कई मरीजों में शुरुआती अवस्था में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे मामलों में ALT और AST का स्तर सामान्य रह सकता है। इसी तरह, लिवर में फाइब्रोसिस यानी घाव के निशान बनने की प्रक्रिया भी सामान्य LFT रिपोर्ट के बावजूद आगे बढ़ सकती है।

इसलिए सामान्य रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि लिवर में किसी तरह की बीमारी होने की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है। किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें? लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, लगातार पेट दर्द, बिना वजह वजन घटना, पाचन संबंधी परेशानी और बार-बार उल्टी होने पर आगे की जांच की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आंखों या त्वचा में पीलापन, पेट अथवा पैरों में सूजन और पेट में पानी जमा होने जैसे लक्षण गंभीर लिवर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन से मिल सकती है जानकारी यदि लक्षण या जोखिम मौजूद हों, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। अल्ट्रासाउंड: लिवर में फैट जमा होने और कुछ अन्य संरचनात्मक समस्याओं का पता लगाने में मदद करता है। फाइब्रोस्कैन: लिवर में फैट और फाइब्रोसिस का आकलन करने में उपयोगी है। अन्य ब्लड टेस्ट: जरूरत के अनुसार हेपेटाइटिस की जांच, एल्ब्यूमिन और प्लेटलेट्स की जांच कराई जा सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति को ये सभी जांच कराने की जरूरत नहीं होती। सही जांच का चयन डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और जोखिम के आधार पर करते हैं।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए? मोटापा, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, अत्यधिक शराब का सेवन और कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल लिवर संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे लोगों को सामान्य LFT रिपोर्ट आने के बावजूद अपने डॉक्टर से नियमित जांच और आगे की निगरानी के बारे में चर्चा करनी चाहिए। निष्कर्ष: LFT रिपोर्ट सामान्य होना राहत की बात है, लेकिन यह लिवर की हर बीमारी को खारिज नहीं करती। लगातार लक्षण या जोखिम कारक मौजूद हों, तो डॉक्टर की सलाह से आगे की जांच कराना जरूरी है।


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