सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मौसम बदलते ही क्यों बढ़ती है एलर्जी, नसों की याददाश्त से जुड़ा कनेक्शन

मौसम बदलते ही छींकें आना, नाक बहना, आंखों में खुजली और त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना जैसी समस्याएं कई लोगों को परेशान करने लगती हैं। आमतौर पर इन लक्षणों को परागकण, धूल, फफूंद और बदलते तापमान से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन अब हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में हुए एक नए अध्ययन ने एलर्जी को समझने का एक नया रास्ता दिखाया है। शोध के मुताबिक, एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के संपर्क में आने के बाद शरीर की संवेदी तंत्रिका कोशिकाएं यानी सेंसरी न्यूरॉन्स भी एक तरह की जैविक याददाश्त विकसित कर सकती हैं। इससे अगली बार उसी तरह के एलर्जेन के संपर्क में आने पर प्रतिक्रिया अधिक तीव्र हो सकती है।

क्या कहती है नई रिसर्च? यह अध्ययन 22 सितंबर 2026 को वैज्ञानिक पत्रिका इम्यूनिटी में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए प्रयोगों में पाया कि कुछ एलर्जेन के शुरुआती संपर्क से संवेदी तंत्रिका कोशिकाओं में बदलाव हो सकते हैं। इन बदलावों के कारण कोशिकाएं भविष्य में दोबारा एलर्जेन मिलने पर ज्यादा सक्रिय प्रतिक्रिया देने लगती हैं। शोध में कोशिकाओं के भीतर ऊर्जा पैदा करने वाली संरचनाओं, जिन्हें माइटोकॉन्ड्रिया कहा जाता है, में भी बदलाव देखे गए। इससे तंत्रिका कोशिकाएं एक तरह की सतर्क अवस्था में आ गईं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रक्रिया समझने में मदद कर सकती है कि बार-बार संपर्क में आने पर कुछ एलर्जी की प्रतिक्रियाएं अधिक गंभीर क्यों हो जाती हैं।

एलर्जी में नसों की क्या भूमिका है? अब तक एलर्जी को मुख्य रूप से प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया के रूप में समझा जाता रहा है। इसमें आईजीई एंटीबॉडी और मास्ट सेल जैसी प्रतिरक्षा कोशिकाएं अहम भूमिका निभाती हैं। नई रिसर्च बताती है कि संवेदी तंत्रिकाएं भी इस प्रक्रिया की शुरुआत और तीव्रता को प्रभावित कर सकती हैं। जब शरीर किसी एलर्जेन के संपर्क में आता है, तो तंत्रिका कोशिकाएं संकेत सक्रिय कर सकती हैं, जो प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया को बढ़ावा देते हैं। अध्ययन में यह भी देखा गया कि एक प्रकार के एलर्जेन के संपर्क से संवेदनशील हुई तंत्रिका कोशिकाएं कुछ दूसरे एलर्जेन के प्रति भी अधिक प्रतिक्रिया दे सकती हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि कुछ लोगों में एक से अधिक प्रकार की एलर्जी क्यों विकसित होती है।

क्या एलर्जी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकेगा? शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि तंत्रिका कोशिकाओं में विकसित यह संवेदनशीलता समय के साथ कमजोर पड़ सकती है। प्रयोगों में कुछ जैविक संकेतों और कोशिकीय प्रक्रियाओं को प्रभावित करने से प्रतिक्रिया को कम करने की संभावनाएं भी सामने आईं। हालांकि, यह शोध अभी शुरुआती वैज्ञानिक समझ और पशु-अध्ययन पर आधारित है। मनुष्यों में इसी प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करके एलर्जी को स्थायी रूप से खत्म किया जा सकता है या नहीं, यह जानने के लिए और अध्ययन आवश्यक हैं। फिलहाल इसे एलर्जी का प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता।

मौसम बदलने पर एलर्जी से कैसे बचें? मौसम बदलने के दौरान धूल, परागकण और फफूंद जैसे संभावित कारणों से बचाव करना उपयोगी हो सकता है। बाहर से आने के बाद चेहरा और हाथ धोना, घर में धूल जमा न होने देना तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना मददगार है। बार-बार एलर्जी होने पर स्वयं दवाएं लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। सांस लेने में गंभीर परेशानी या गले और चेहरे पर अचानक सूजन होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।


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