सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन से पोषक तत्वों को संसाधित करने, पित्त बनाने और शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी खासियत यह है कि लिवर में क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करने और अपनी कोशिकाओं को दोबारा विकसित करने की क्षमता होती है। इस प्रक्रिया को लिवर रीजनरेशन कहा जाता है। हालांकि, यह क्षमता असीमित नहीं है। लंबे समय तक फैटी लिवर, शराब के सेवन, वायरल हेपेटाइटिस या अन्य कारणों से लगातार नुकसान होने पर लिवर में स्थायी निशान बनने लग सकते हैं।

फैटी लिवर: शुरुआती चेतावनी फैटी लिवर की स्थिति में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। शुरुआत में अक्सर इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि उसके लिवर पर असर पड़ रहा है। समय रहते खानपान और जीवनशैली में बदलाव करने से लिवर में जमा वसा कम हो सकती है और शुरुआती अवस्था में बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

सूजन और फाइब्रोसिस बढ़ाते हैं खतरा यदि फैटी लिवर को नजरअंदाज किया जाए, तो कुछ लोगों में लिवर में सूजन और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। लगातार नुकसान के कारण लिवर में रेशेदार ऊतक बनने लगते हैं, जिसे फाइब्रोसिस कहा जाता है। बीमारी बढ़ने पर यह क्षति गंभीर रूप ले सकती है। हालांकि, हर फैटी लिवर मरीज में बीमारी इसी क्रम में बढ़े, यह जरूरी नहीं है।

सिरोसिस: जब नुकसान गंभीर हो जाता है लिवर की लंबे समय तक चली आ रही क्षति के कारण जब बड़े पैमाने पर निशान और संरचनात्मक बदलाव बनने लगते हैं, तो इस स्थिति को सिरोसिस कहा जाता है। इस अवस्था में लिवर की सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। शुरुआती सिरोसिस में बीमारी के कारण का उपचार करके आगे होने वाले नुकसान को धीमा किया जा सकता है, लेकिन पहले से बने निशानों को पूरी तरह उलटना अक्सर संभव नहीं होता। गंभीर अवस्था में पेट में पानी भरना, पीलिया, रक्तस्राव और भ्रम जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। कुछ मरीजों में लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत भी पड़ सकती है। लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? संतुलित भोजन करें और मीठे पेय पदार्थों तथा अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें। वजन अधिक होने पर चिकित्सकीय सलाह से धीरे-धीरे वजन कम करें। नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें। शराब से परहेज करें, खासकर लिवर की बीमारी होने पर। मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल और अन्य संबंधित समस्याओं को नियंत्रित रखें। जरूरत के अनुसार लिवर फंक्शन टेस्ट और चिकित्सकीय जांच कराएं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं या हर्बल सप्लीमेंट न लें। समय पर जांच से बच सकती है गंभीर क्षति लिवर की बीमारी शुरुआती चरणों में बिना लक्षणों के भी मौजूद हो सकती है। इसलिए जोखिम वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह से जांच करानी चाहिए। आंखों या त्वचा में पीलापन, पेट में सूजन, असामान्य रक्तस्राव या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें। लिवर की खुद को ठीक करने की क्षमता बीमारी के कारण और उसकी अवस्था पर निर्भर करती है। इसलिए शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और उपचार कराना सबसे महत्वपूर्ण है।


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