सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सिर्फ प्रदूषण नहीं, परफ्यूम से रूम फ्रेशनर तक बढ़ा सकते हैं खांसी और सांस की परेशानी

नई दिल्ली। खांसी और सांस लेने में परेशानी के लिए केवल बाहर का वायु प्रदूषण ही जिम्मेदार नहीं होता। घर के भीतर इस्तेमाल होने वाले परफ्यूम, रूम फ्रेशनर, सफाई के रसायन और अगरबत्ती का धुआं भी कुछ लोगों में सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन उत्पादों से निकलने वाले सुगंधित रसायन और हवा में मौजूद सूक्ष्म कण आंख, नाक और गले में जलन पैदा कर सकते हैं। अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों में इनके संपर्क से खांसी, घरघराहट और सांस फूलने जैसी परेशानी बढ़ सकती है।

परफ्यूम और रूम फ्रेशनर से हो सकती है परेशानी परफ्यूम, सुगंधित स्प्रे और रूम फ्रेशनर में मौजूद कुछ रसायन संवेदनशील लोगों के श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। बंद कमरे में इनका बार-बार इस्तेमाल करने से परेशानी बढ़ सकती है। हर व्यक्ति पर इनका प्रभाव एक जैसा नहीं होता, लेकिन यदि किसी उत्पाद के इस्तेमाल के बाद लगातार खांसी या सांस लेने में दिक्कत हो, तो उसका उपयोग रोकना उचित है। सफाई के उत्पाद और कीटनाशक भी बन सकते हैं कारण फर्श साफ करने वाले रसायन, बाथरूम क्लीनर, कीटनाशक स्प्रे और तेज गंध वाले अन्य उत्पाद भी घर की हवा की गुणवत्ता प्रभावित कर सकते हैं। सफाई के दौरान उत्पादों के निर्देशों का पालन करना और पर्याप्त हवा का आवागमन बनाए रखना जरूरी है। अलग-अलग सफाई रसायनों को आपस में मिलाने से खतरनाक गैसें बन सकती हैं, इसलिए ऐसा बिल्कुल न करें।

अगरबत्ती और सुगंधित मोमबत्तियों का धुआं अगरबत्ती, धूप और सुगंधित मोमबत्तियां जलाने से हवा में सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक फैल सकते हैं। इनका धुआं अस्थमा के मरीजों और संवेदनशील लोगों में खांसी या सांस की परेशानी बढ़ा सकता है। घर के भीतर इनके इस्तेमाल को सीमित करना और धुआं जमा होने से रोकना बेहतर है।

घर की हवा को साफ रखने के लिए क्या करें?

जरूरत न हो तो परफ्यूम और रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल कम करें।

संभव हो तो बिना सुगंध वाले सफाई उत्पाद चुनें।

सफाई करते समय उचित वेंटिलेशन रखें और उत्पादों के निर्देश पढ़ें।

घर में धूम्रपान और अनावश्यक धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों से बचें।

नमी और सीलन पर नियंत्रण रखें, क्योंकि फफूंद भी सांस की समस्याएं बढ़ा सकती है।

यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहे, बार-बार घरघराहट हो या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से परामर्श लें। गंभीर सांस की तकलीफ होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।


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