सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लगातार कब्ज को न करें नजरअंदाज, रेक्टल कैंसर के ये संकेत पहचानें
नई दिल्ली। कब्ज की समस्या आम है और कई बार खानपान, पानी की कमी या शारीरिक गतिविधि कम होने के कारण होती है। लेकिन यदि कब्ज लंबे समय तक बनी रहे, मल त्याग की आदतों में बदलाव आए या मल में खून दिखाई दे, तो इसे सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण कभी-कभी रेक्टल कैंसर यानी मलाशय के कैंसर से भी जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, केवल कब्ज होने का मतलब कैंसर होना नहीं है। AIIMS के डॉक्टर ने क्या बताया? आजतक की 24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, AIIMS नई दिल्ली के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एम.डी. रे ने बताया कि लंबे समय तक कब्ज रहने से कुछ लोगों को बवासीर की समस्या हो सकती है। वहीं, मलाशय के कैंसर में भी खून आ सकता है, जिसे कई बार लोग बवासीर समझ लेते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बवासीर और रेक्टल कैंसर अलग-अलग स्थितियां हैं। बवासीर कैंसर में नहीं बदलता, लेकिन बवासीर होने से कैंसर की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं होती। इसलिए मल में खून आने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
रेक्टल कैंसर के प्रमुख लक्षण रेक्टल कैंसर में हर व्यक्ति को एक जैसे लक्षण नहीं होते। कुछ लोगों में शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण भी नहीं दिखाई देता। संभावित संकेतों में शामिल हैं: मल में या मल त्याग के दौरान खून आना। कब्ज या दस्त की समस्या लंबे समय तक बने रहना। मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव। पेट में दर्द, ऐंठन या असहजता। मल त्याग के बाद भी पेट साफ न होने का एहसास। बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना।कमजोरी, थकान या खून की कमी यानी एनीमिया। इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं, लेकिन इनके लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
कब खतरे की घंटी समझें? यदि कब्ज लंबे समय से बनी हुई है और उसके साथ मल में खून, वजन कम होना, पेट में लगातार परेशानी या एनीमिया जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करें। मल में खून आने को केवल बवासीर मानकर घरेलू उपचार करते रहना उचित नहीं है। फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. नितेश रोहतगी के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रेक्टल कैंसर का समय पर पता चलने पर उपचार की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।
बचाव और जांच क्यों जरूरी है? कब्ज से राहत के लिए पर्याप्त पानी पीना, फाइबरयुक्त भोजन लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना मददगार हो सकता है। लेकिन इन उपायों के बावजूद समस्या बनी रहे या अन्य चेतावनी संकेत दिखाई दें, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक परीक्षण, मल की जांच, एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी जैसे परीक्षण सुझा सकते हैं। कौन-सी जांच जरूरी है, यह व्यक्ति की उम्र, लक्षणों और मेडिकल इतिहास पर निर्भर करता है।
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