सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। वायु प्रदूषण को आमतौर पर सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब शोधों में इसका संबंध लिवर की सेहत से भी सामने आया है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, Nanotoxicology जर्नल में प्रकाशित शोध के मेटा-एनालिसिस में 46 शोधपत्रों के निष्कर्षों का आकलन किया गया। इसमें लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने और लिवर एंजाइम में बदलाव तथा मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर बीमारी के बढ़े जोखिम के बीच संबंध पाया गया।
प्रदूषण लिवर को कैसे प्रभावित कर सकता है? हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं। प्रदूषण से जुड़ी सूजन और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस जैसी प्रक्रियाएं शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकती हैं। शोधों में ALT और AST जैसे लिवर एंजाइम के स्तर में बदलाव भी दर्ज किए गए हैं। हालांकि, इन बदलावों का अर्थ हर व्यक्ति में लिवर की बीमारी होना नहीं है। इन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत, मोटापे से जूझ रहे लोग: अधिक वजन और मेटाबॉलिक समस्याओं के साथ फैटी लिवर का जोखिम पहले से बढ़ सकता है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीज: डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस लिवर की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। प्रदूषण के लंबे संपर्क को लेकर भी सावधानी जरूरी है। बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ लिवर सहित अन्य अंगों से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।
धूम्रपान करने वाले लोग: धूम्रपान और प्रदूषित हवा का संयुक्त संपर्क स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त चिंता का विषय है। प्रदूषित इलाकों में लंबे समय तक रहने वाले लोग: यातायात, औद्योगिक उत्सर्जन और खराब वायु गुणवत्ता वाले क्षेत्रों में लगातार रहने से प्रदूषण के संपर्क की अवधि बढ़ सकती है। कुछ शोधों में अधिक प्रदूषण के संपर्क और लिवर संबंधी बीमारियों के बीच संबंध पाया गया है। लिवर की सुरक्षा के लिए क्या करें? वायु गुणवत्ता खराब होने पर बाहर की गतिविधियां सीमित रखें और स्थानीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर नजर रखें। जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन पर नियंत्रण और शराब से परहेज लिवर की सेहत के लिए उपयोगी कदम हैं। यदि पहले से लिवर की बीमारी, मोटापा या डायबिटीज है, तो डॉक्टर से उचित जांच और निगरानी के बारे में सलाह लें। फिलहाल, केवल प्रदूषण के संपर्क में आने के आधार पर सभी लोगों के लिए लिवर जांच का कोई निश्चित अंतराल स्थापित नहीं है।
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