सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पुरुषों में भी बढ़ रही इनफर्टिलिटी, इन बीमारियों से घट रही प्रजनन क्षमता

नई दिल्ली। माता-पिता बनने में परेशानी होने पर अक्सर महिलाओं को जिम्मेदार मान लिया जाता है, जबकि मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों में भी इनफर्टिलिटी यानी बांझपन एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है। भारत में IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) उपचार की मांग बढ़ने के बीच विशेषज्ञ कम स्पर्म काउंट, शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। भारत में बढ़ रही IVF की मांग आजतक की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जून 2024 तक लगभग 3.20 लाख IVF साइकिल दर्ज की गई थीं। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2028 तक यह संख्या 5.50 लाख तक पहुंच सकती है। हालांकि, IVF की बढ़ती मांग को केवल इनफर्टिलिटी में वृद्धि का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जागरूकता, जांच की उपलब्धता और उपचार तक पहुंच भी इसकी वजह हो सकती हैं।

पुरुषों में इनफर्टिलिटी की प्रमुख वजहें कम स्पर्म काउंट: शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से कम होने की स्थिति को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं। इससे गर्भधारण की संभावना प्रभावित हो सकती है। डायबिटीज और हार्मोन संबंधी समस्याएं: मधुमेह और टेस्टोस्टेरोन सहित कुछ हार्मोन के असंतुलन से प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी: अधिक वजन शरीर के हार्मोनल संतुलन और प्रजनन स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। धूम्रपान और शराब: तंबाकू, धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन शुक्राणुओं की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकता है। तनाव और नींद की कमी: लगातार तनाव, अपर्याप्त नींद और अनियमित दिनचर्या भी प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ अन्य चिकित्सकीय स्थितियां: वैरिकोसील, संक्रमण, आनुवंशिक समस्याएं और प्रजनन अंगों से जुड़ी कुछ बीमारियां भी पुरुषों में इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती हैं। मांसपेशियां बढ़ाने के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह लिए जाने वाले एनाबॉलिक स्टेरॉयड भी शुक्राणु उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

महिलाओं में PCOS भी बड़ी चुनौती महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) अंडोत्सर्जन को प्रभावित कर सकता है और कुछ मामलों में गर्भधारण में परेशानी पैदा कर सकता है। लेकिन इनफर्टिलिटी का आकलन केवल महिला की जांच के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। विशेषज्ञ दोनों पार्टनर की एक साथ जांच करने की सलाह देते हैं, ताकि समस्या का कारण समय पर पता लगाया जा सके।

कब डॉक्टर से सलाह लें? यदि एक वर्ष तक नियमित असुरक्षित यौन संबंध के बावजूद गर्भधारण नहीं होता, तो दोनों पार्टनर को चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। महिला की उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक होने पर छह महीने प्रयास के बाद जांच कराने की सलाह दी जाती है। पहले से कोई प्रजनन संबंधी बीमारी या अन्य जोखिम हो, तो डॉक्टर से पहले ही संपर्क करना उचित है। पुरुषों में शुरुआती जांच के लिए सीमेन एनालिसिस यानी वीर्य जांच की जा सकती है। जांच और इलाज का निर्णय डॉक्टर की सलाह के आधार पर होना चाहिए। इनफर्टिलिटी किसी एक पार्टनर की समस्या मानने के बजाय दोनों की स्वास्थ्य स्थिति को समझना जरूरी है।


Hashtags: #Health #Bhopal #पुरुषों #बढ़ #रही #इनफर्टिलिटी #बीमारियों #प्रजनन #क्षमता #पुरुषोंमेंभीबढ़