सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : साल में एक बार कराएं किडनी की जांच, समय रहते चलेगा बीमारी का पता

किडनी हमारे शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के साथ रक्त में खनिजों का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन किडनी से जुड़ी पुरानी बीमारियां शुरुआती दौर में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती रहती हैं। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच से बीमारी का समय रहते पता लगाने और उसके बढ़ने की रफ्तार को धीमा करने में मदद मिल सकती है।

कौन-से टेस्ट हैं जरूरी? किडनी की कार्यक्षमता जानने के लिए डॉक्टर मुख्य रूप से दो तरह की जांच की सलाह दे सकते हैं। सीरम क्रिएटिनिन और eGFR टेस्ट: खून में क्रिएटिनिन के स्तर के आधार पर eGFR से पता लगाया जाता है कि किडनी रक्त को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है। यूरिन एल्ब्यूमिन टेस्ट: पेशाब में एल्ब्यूमिन नामक प्रोटीन की जांच की जाती है। इसकी असामान्य मात्रा किडनी को नुकसान पहुंचने का संकेत हो सकती है। दोनों जांचों के नतीजों को साथ देखकर किडनी की सेहत का बेहतर आकलन किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अन्य जांच भी करा सकते हैं।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए? डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास होने पर जोखिम बढ़ सकता है। अधिक उम्र, मोटापा, धूम्रपान, बार-बार किडनी स्टोन या लंबे समय तक कुछ ऐसी दवाओं का इस्तेमाल भी जोखिम से जुड़ा हो सकता है, जो किडनी को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित लोगों को आम तौर पर हर साल किडनी की जांच करानी चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर और अन्य जोखिम वाले लोगों को जांच कितनी बार करानी है, यह डॉक्टर उनकी स्थिति के आधार पर तय कर सकते हैं।

लक्षणों का इंतजार न करें पैरों या टखनों में सूजन, पेशाब में झाग, पेशाब की मात्रा या आवृत्ति में बदलाव, लगातार थकान, भूख कम लगना और सांस फूलना किडनी की बीमारी में दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं और शुरुआती किडनी रोग में कोई लक्षण नहीं भी दिख सकता। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर किडनी की सेहत का अंदाजा लगाना सही नहीं है। समय-समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है। रिपोर्ट असामान्य आने पर घबराने के बजाय चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना जरूरी है। ध्यान दें: हर व्यक्ति को एक ही अंतराल पर किडनी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। जांच का सही समय उम्र, स्वास्थ्य और जोखिम के आधार पर डॉक्टर से तय करें।


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