सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बार इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों और डिस्पोजेबल सर्जिकल सामग्री के दोबारा उपयोग पर रोक को सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। यह निर्देश 16 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र के माध्यम से दिया गया, जिसकी जानकारी 23 से 25 अक्टूबर के बीच सामने आई।

किन उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर रोक? डीजीएचएस के अनुसार, कुछ निजी और कॉरपोरेट अस्पतालों में एक बार इस्तेमाल के लिए बनाए गए उपकरणों को रोगी पर उपयोग के बाद स्टरलाइज करके दोबारा इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इनमें कार्डियक कैथेटर, गाइडवायर, बैलून कैथेटर, डायलिसिस से जुड़े कुछ उपकरण, सर्जिकल स्टेपलर, लैप्रोस्कोपिक ट्रोकार, सिरिंज और सुई जैसे उपकरण शामिल बताए गए हैं।

संक्रमण और उपकरण खराब होने का खतरा स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि केवल स्टरलाइज करने से किसी एक बार इस्तेमाल के लिए बने उपकरण को दोबारा उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता। ऐसा करने से संक्रमण फैलने, उपकरण की कार्यक्षमता घटने और उपचार के दौरान जटिलताएं पैदा होने का जोखिम हो सकता है। दूषित सुई या उपकरण के दोबारा इस्तेमाल से एचआईवी तथा हेपेटाइटिस बी और सी जैसे संक्रमण फैलने की आशंका भी रहती है।

राज्यों को निगरानी और कार्रवाई के निर्देश डीजीएचएस ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों, औषधि नियंत्रकों तथा संबंधित अधिकारियों से अस्पतालों का निरीक्षण और निगरानी बढ़ाने को कहा है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लागू कानूनों के तहत उचित कार्रवाई की जा सकती है। अस्पतालों को उपकरणों के मूल निर्माता के निर्देशों के अनुसार ही उनका उपयोग और निपटान करना होगा।

मरीजों के खर्च पर भी उठे सवाल डीजीएचएस ने यह चिंता भी जताई कि कुछ मामलों में दोबारा इस्तेमाल किए गए उपकरणों का पूरा खर्च मरीजों से लिया गया या सरकारी योजनाओं के तहत उसकी प्रतिपूर्ति की गई। निर्देश का उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही को मजबूत करना है।


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