सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: मसूड़ों की बीमारी से बढ़ सकता है किडनी की परेशानी का खतरा
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल : नई दिल्ली। दांतों और मसूड़ों की सेहत का असर केवल मुंह तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के दूसरे अंगों के स्वास्थ्य से भी जुड़ा हो सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, मसूड़ों की बीमारी और किडनी की समस्याओं के बीच संबंध पाया गया है। मुंह में संक्रमण और लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन पहले से किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों की स्थिति को बिगाड़ सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि मसूड़ों की बीमारी सीधे तौर पर किडनी खराब होने का कारण बनती है।
मसूड़ों और किडनी के बीच क्या है संबंध? मसूड़ों की बीमारी, जिसे पेरियोडोंटाइटिस कहा जाता है, आमतौर पर दांतों के आसपास बैक्टीरिया के संक्रमण और सूजन से जुड़ी होती है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इन बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रतिक्रिया देती है। यदि सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो इसका असर शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, मुंह के संक्रमण और सूजन से पहले से किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों में जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। कुछ मामलों में रक्तचाप को नियंत्रित करना भी मुश्किल हो सकता है। डायलिसिस करा रहे या किडनी प्रत्यारोपण के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली दवाएं ले रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। मुंह की सेहत का ध्यान कैसे रखें? डॉक्टरों के अनुसार, दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की आदतों में कुछ बदलाव करना जरूरी है। दिन में दो बार ब्रश करें: फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट और मुलायम ब्रिसल वाले ब्रश का इस्तेमाल करें। दांतों के बीच सफाई करें: रोजाना फ्लॉस या दांतों के बीच सफाई करने वाले उपयुक्त साधन का उपयोग करें। मीठे खाद्य पदार्थ सीमित रखें: खासकर सोने से पहले मीठा खाने से बचें। तंबाकू और गुटखे से दूर रहें: पान मसाला और धूम्रपान मुंह की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। दंत चिकित्सक से जांच कराएं: नियमित जांच से मसूड़ों की बीमारी और संक्रमण का समय रहते पता लगाया जा सकता है। समस्या होने पर इलाज कराएं: मसूड़ों से खून आना, सूजन, लगातार बदबू या दांतों में दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
पर्याप्त नींद भी जरूरी
पर्याप्त नींद रक्तचाप और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद करती है, जो किडनी की सेहत के लिए महत्वपूर्ण हैं। वयस्कों को आमतौर पर हर रात सात से आठ घंटे सोने की सलाह दी जाती है। हालांकि, नींद और किडनी की बीमारी के बीच संबंध दिखाने वाले अध्ययनों से यह साबित नहीं होता कि नींद की कमी अकेले ही किडनी की बीमारी का कारण बनती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मुंह की सफाई को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना समग्र स्वास्थ्य की देखभाल का महत्वपूर्ण कदम है। जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उन्हें दंत चिकित्सक को अपनी बीमारी, डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण से जुड़ी जानकारी अवश्य देनी चाहिए।
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