सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) उपचार के असफल होने पर डॉक्टर के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आईवीएफ प्रक्रिया से गर्भधारण नहीं होना अपने आप में धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं है। किसी चिकित्सा प्रक्रिया को गर्भावस्था की कानूनी गारंटी नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसकी सफलता कई शारीरिक और चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

न्यायमूर्ति चवन प्रकाश की पीठ ने बुलंदशहर की महिला फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. सरिता तेवतिया के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। मामला जयवीर सिंह की शिकायत से जुड़ा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नी के आईवीएफ उपचार के लिए डॉक्टर से संपर्क किया था। आरोप था कि डॉक्टर ने उपचार के लिए 3.5 लाख रुपये लिए, लेकिन केवल 1.6 लाख रुपये की रसीद दी। उपचार के बाद भी पत्नी गर्भवती नहीं हुईं तो उन्होंने रकम वापस मांगी, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत का रुख किया। मजिस्ट्रेट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत डॉक्टर को समन जारी किया था। डॉक्टर ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी का अपराध साबित करने के लिए यह जरूरी है कि शुरुआत से ही आरोपी की मंशा धोखा देने की रही हो। केवल इलाज का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से आपराधिक मंशा साबित नहीं होती। अदालत ने यह भी कहा कि चिकित्सा विज्ञान कोई सटीक विज्ञान नहीं है और हर उपचार की सफलता की गारंटी संभव नहीं है। पीठ ने माना कि उपलब्ध तथ्यों से डॉक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। इसलिए समन आदेश, पुनरीक्षण अदालत का आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी गई।


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