सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल: सिरदर्द एक आम समस्या है, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे या इसकी तीव्रता लगातार बढ़ती जाए तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। इसके पीछे तनाव, नींद की कमी और आंखों की कमजोरी जैसे सामान्य कारण हो सकते हैं। वहीं, कुछ मामलों में सिरदर्द माइग्रेन, साइनस संक्रमण, ब्लड प्रेशर या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सिरदर्द के कई प्रकार होते हैं। टेंशन-टाइप सिरदर्द में सिर के दोनों ओर दबाव या कसाव जैसा महसूस होता है। यह तनाव, गलत पोस्चर और नींद की परेशानी से जुड़ा हो सकता है। माइग्रेन में अक्सर सिर के एक तरफ तेज धड़कन जैसा दर्द होता है। इसके साथ उल्टी, मतली और रोशनी या तेज आवाज से परेशानी भी हो सकती है। क्लस्टर हेडेक में आंख के आसपास एक तरफ बहुत तेज दर्द होता है, जो कुछ समय के अंतराल पर बार-बार हो सकता है। इसके अलावा सर्दी-जुकाम, साइनस में सूजन, शरीर में पानी की कमी, भोजन छोड़ना और दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक इस्तेमाल भी सिरदर्द की वजह बन सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में मस्तिष्क में संक्रमण, रक्तस्राव या अन्य गंभीर बीमारी भी इसका कारण हो सकती है।
डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी है? यदि सिरदर्द बार-बार हो रहा है, पहले से ज्यादा गंभीर हो गया है, रोजमर्रा के काम प्रभावित कर रहा है या दवा लेने के बावजूद ठीक नहीं हो रहा, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अचानक शुरू हुआ बेहद तेज सिरदर्द, बुखार के साथ गर्दन में अकड़न, बेहोशी, भ्रम, बोलने या देखने में परेशानी तथा शरीर के एक हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण आपात स्थिति का संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। विशेषज्ञ सिरदर्द की आवृत्ति, अवधि, तीव्रता और संभावित कारणों का रिकॉर्ड रखने की सलाह देते हैं। इससे सही कारण पहचानने और उचित उपचार तय करने में मदद मिल सकती है।
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