सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: योग और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज से बढ़ती है महिलाओं की फर्टिलिटी? जानिए डॉक्टरों की राय
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल: महिलाओं में प्रजनन स्वास्थ्य और गर्भधारण की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए योग और व्यायाम को उपयोगी माना जाता है। विशेष रूप से योगासन और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज को लेकर यह सवाल उठता है कि क्या इनके नियमित अभ्यास से फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता बढ़ाई जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ये गतिविधियां समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इन्हें गर्भधारण की गारंटी या बांझपन का उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
योग के नियमित अभ्यास से तनाव कम करने, नींद बेहतर बनाने और शरीर में हार्मोनल संतुलन को अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग मिलने की संभावना रहती है। तनाव और अनियमित जीवनशैली प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में प्राणायाम, ध्यान और हल्के योगासन मानसिक स्वास्थ्य तथा शारीरिक सक्रियता बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
वहीं, पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज, जिन्हें कीगल एक्सरसाइज भी कहा जाता है, श्रोणि क्षेत्र की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं। इससे मूत्राशय पर नियंत्रण और गर्भावस्था के दौरान तथा प्रसव के बाद मांसपेशियों के स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। हालांकि, इन अभ्यासों से अंडों की गुणवत्ता, ओव्यूलेशन या गर्भधारण की संभावना सीधे बढ़ने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं की फर्टिलिटी उम्र, हार्मोन, अंडाशय की कार्यक्षमता, फैलोपियन ट्यूब और अन्य चिकित्सकीय कारणों पर निर्भर करती है। यदि नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। सामान्यतः 35 वर्ष से कम उम्र में एक वर्ष और 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में छह महीने तक प्रयास के बाद विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। इसलिए योग और व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, लेकिन प्रजनन संबंधी समस्याओं के लिए उचित चिकित्सकीय सलाह और उपचार को प्राथमिकता दें।
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