लंबा दिखने की चाह में अब कुछ लोग सर्जरी का सहारा ले रहे हैं। इसके लिए पैरों की हड्डियां कटवाकर उनकी लंबाई बढ़ाई जा रही है। इस प्रक्रिया को लिम्ब लेंथनिंग या स्टेचर लेंथनिंग सर्जरी कहा जाता है। भारत सहित कई देशों में कॉस्मेटिक कारणों से इस सर्जरी में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यह कोई सामान्य कॉस्मेटिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जटिल और लंबी रिकवरी वाली बड़ी ऑर्थोपेडिक सर्जरी है।
कैसे बढ़ाई जाती है हाइट?
इस सर्जरी में जांघ या पिंडली की हड्डी को नियंत्रित तरीके से काटा जाता है। इसके बाद हड्डी में विशेष मेटल रॉड या बाहरी फ्रेम लगाया जाता है। उपकरण की मदद से हड्डी के दोनों हिस्सों को धीरे-धीरे अलग किया जाता है। इस दौरान उनके बीच नई हड्डी बनने लगती है। आमतौर पर लंबाई बढ़ाने की प्रक्रिया करीब एक मिलीमीटर प्रतिदिन की गति से की जाती है। इसके बाद नई हड्डी को मजबूत होने में कई महीने लग सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक प्रक्रिया से लगभग 6 से 8 सेंटीमीटर तक हाइट बढ़ाई जा सकती है। हालांकि वास्तविक परिणाम व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और हड्डियों की क्षमता पर निर्भर करते हैं।
कितनी सुरक्षित है सर्जरी?
डॉक्टरों के मुताबिक, इस सर्जरी में कई गंभीर जोखिम होते हैं। हड्डी का सही तरीके से न जुड़ना, संक्रमण, नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान, मांसपेशियों में खिंचाव तथा घुटने और टखने के जोड़ों में अकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक दर्द और चलने-फिरने में परेशानी भी बनी रह सकती है।
रिकवरी में लगते हैं कई महीने
सर्जरी के बाद मरीज को लंबे समय तक नियमित फिजियोथेरेपी, एक्स-रे और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत होती है। कई महीनों तक चलने-फिरने के लिए सहारे की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि केवल कॉस्मेटिक कारणों से यह सर्जरी कराने से पहले इसके जोखिम, खर्च और लंबी रिकवरी पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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