प्रदूषण से घट रही जीवन प्रत्याशा, दिल्ली में 8.2 साल का नुकसान
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल:
देश के बड़े शहरों में वायु प्रदूषण का असर अब केवल सांस और फेफड़ों की बीमारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा भी घटा रहा है। एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (AQLI) 2025 के आंकड़ों के अनुसार, यदि भारत के शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की निर्धारित सीमा तक आ जाए, तो दिल्ली के निवासियों की औसत उम्र 8.2 साल तक बढ़ सकती है। वहीं कोलकाता में 4.1 साल, हैदराबाद में 3.2 साल, मुंबई में 3.1 साल, चेन्नई में 2.2 साल और बेंगलुरु में 2.1 साल का संभावित लाभ हो सकता है।
यह विश्लेषण वर्ष 2023 के प्रदूषण संबंधी आंकड़ों पर आधारित है। WHO के दिशानिर्देशों के मुताबिक, हवा में PM2.5 कणों की वार्षिक औसत मात्रा 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। भारत के अधिकांश हिस्सों में इसका स्तर इस सीमा से काफी ऊपर है। रिपोर्ट के अनुसार, देश का औसत PM2.5 स्तर WHO की निर्धारित सीमा से आठ गुना से भी अधिक रहा।
दिल्ली की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में 2024 और 2025 के दौरान एक भी दिन वायु गुणवत्ता 'अच्छी' श्रेणी में दर्ज नहीं हुई। वर्ष 2026 में 4 नवंबर तक केवल एक दिन हवा अच्छी रही।
दूसरी ओर, कोलकाता में 2025 के दौरान 97 दिन वायु गुणवत्ता अच्छी दर्ज की गई, जबकि मुंबई में यह संख्या 55 दिन रही। हालांकि, इन शहरों में भी प्रदूषण का दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव गंभीर बना हुआ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों के साथ हृदय और रक्त संचार प्रणाली को भी प्रभावित कर सकते हैं। ये आंकड़े स्वच्छ हवा को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता बनाने की जरूरत रेखांकित करते हैं।
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