ITDC India e-Press / Agencies

रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाला सामान्य नमक भविष्य में लाखों लोगों की जान बचाने या गंवाने की वजह बन सकता है। एक नए वैश्विक अध्ययन के अनुसार, सामान्य नमक की जगह पोटैशियम युक्त कम सोडियम वाले नमक का इस्तेमाल किया जाए तो भारत में हर साल करीब चार लाख मौतों को रोका जा सकता है। इसके अलावा हृदय और किडनी से जुड़ी लगभग 15.2 लाख नई बीमारियों के मामलों को भी टाला जा सकता है।

‘नेचर हेल्थ’ में प्रकाशित इस अध्ययन को जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के शोधकर्ताओं ने 193 देशों के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया है। शोध में अनुमान लगाया गया है कि दुनिया भर में कम सोडियम वाले नमक को अपनाने से हर साल करीब 30 लाख मौतें और हृदय व किडनी रोगों के एक करोड़ से अधिक नए मामले रोके जा सकते हैं।

सामान्य नमक में मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड होता है, जबकि कम सोडियम वाले विकल्पों में इसके कुछ हिस्से की जगह पोटैशियम क्लोराइड मिलाया जाता है। इससे भोजन में सोडियम की मात्रा घटती है और पोटैशियम बढ़ता है। अधिक सोडियम का सेवन रक्तचाप बढ़ाने और हार्ट अटैक, स्ट्रोक तथा किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाने से जुड़ा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2025 में वयस्कों की सामान्य आबादी के लिए पोटैशियम युक्त कम सोडियम वाले नमक के इस्तेमाल की सिफारिश की थी। हालांकि, यह विकल्प सभी के लिए सुरक्षित नहीं है। किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों और पोटैशियम बढ़ाने वाली दवाएं लेने वालों में इसका सेवन खतरनाक हो सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना सामान्य नमक बदलने से बचना चाहिए।


Hashtags: #Health #Bhopal #सोडियम #नमक #सकती #लाखों #जानें #सीएनएन #सेंट्रल #कमसोडियमनमकसे