सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: पानी पीने के बाद भी सूखता है मुंह, जेरोस्टोमिया हो सकता है कारण
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल: बार-बार पानी पीने के बावजूद यदि मुंह में सूखापन बना रहता है, तो इसे केवल प्यास या मौसम का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह जेरोस्टोमिया यानी ड्राई माउथ की समस्या हो सकती है। इस स्थिति में मुंह की लार ग्रंथियां पर्याप्त मात्रा में लार नहीं बनातीं या लार का प्रवाह कम हो जाता है। लार भोजन चबाने और निगलने में मदद करने के साथ दांतों को सड़न और मुंह को संक्रमण से बचाने में भी अहम भूमिका निभाती है।
क्या हैं प्रमुख कारण और लक्षणजेरोस्टोमिया के पीछे शरीर में पानी की कमी, कुछ दवाओं का दुष्प्रभाव, मधुमेह, स्जोग्रेन सिंड्रोम, मुंह खोलकर सोना, धूम्रपान और शराब का सेवन जैसे कारण हो सकते हैं। कैंसर के इलाज में दी जाने वाली रेडिएशन और कीमोथेरेपी भी लार बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके प्रमुख लक्षणों में मुंह में लगातार चिपचिपापन या सूखापन, जीभ में जलन, होंठ फटना, गले में सूखापन, सांसों में दुर्गंध और स्वाद में बदलाव शामिल हैं। गंभीर स्थिति में खाना चबाने, बोलने और निगलने में परेशानी हो सकती है। लार कम होने से दांतों में कैविटी और मुंह में फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
बचाव और राहत के 10 उपाय दिनभर थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पिएं, शुगर-फ्री च्यूइंग गम चबाएं, बिना चीनी वाली कैंडी का इस्तेमाल करें, चाय-कॉफी और कैफीन का सेवन सीमित रखें, शराब और तंबाकू से बचें, बहुत नमकीन और मसालेदार भोजन कम करें, रात में कमरे में ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें, होंठों पर लिप बाम लगाएं, दिन में दो बार फ्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करें और नियमित रूप से दांतों की जांच कराएं। यदि कई सप्ताह तक मुंह का सूखापन बना रहे या खाने-बोलने में परेशानी हो, तो डॉक्टर या डेंटिस्ट से जांच कराएं। अपनी मर्जी से किसी निर्धारित दवा को बंद न करें। उपचार में कारण के अनुसार दवा में बदलाव, कृत्रिम लार या लार बनने में मदद करने वाली दवाएं शामिल हो सकती हैं।
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