आजकल वजन नियंत्रित रखने और सेहतमंद नाश्ते के विकल्प के रूप में ओट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। फाइबर से भरपूर ओट्स को दिल की सेहत, पाचन और ब्लड शुगर नियंत्रण के लिए फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, इसे हेल्दी समझकर किसी भी तरीके से खाना सही नहीं है। ओट्स का पूरा फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के ओट्स चुनते हैं और उन्हें कैसे तैयार करते हैं।
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, स्टील-कट और रोल्ड ओट्स बेहतर विकल्प माने जाते हैं, क्योंकि इनमें प्रसंस्करण अपेक्षाकृत कम होता है। इसके मुकाबले फ्लेवर्ड और इंस्टेंट ओट्स के कुछ पैकेट में अतिरिक्त चीनी, नमक और अन्य मिलाए गए पदार्थ हो सकते हैं। इसलिए खरीदारी करते समय पैकेट पर मौजूद सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी जरूर पढ़ें।
ओट्स में मौजूद बीटा-ग्लूकन नामक घुलनशील फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखने और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद कर सकता है। इसे दूध या बिना चीनी वाले दही के साथ तैयार किया जा सकता है। इसमें मौसमी फल, बादाम, अखरोट, अलसी या चिया सीड्स मिलाने से पौष्टिकता बढ़ती है। नमकीन ओट्स बनाते समय सब्जियां शामिल करना भी अच्छा विकल्प है।
हालांकि, अचानक अधिक मात्रा में ओट्स खाने से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलने या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं। डायबिटीज के मरीज मात्रा और अन्य खाद्य पदार्थों का संतुलन रखें। सीलिएक रोग या ग्लूटेन संवेदनशीलता वाले लोग प्रमाणित ग्लूटेन-फ्री ओट्स ही चुनें। किडनी की बीमारी या विशेष डाइट लेने वाले लोग डॉक्टर की सलाह से इसे अपने भोजन में शामिल करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओट्स अपने आप वजन घटाने का उपाय नहीं हैं। संतुलित खानपान, सही मात्रा और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ ही इनका बेहतर लाभ मिल सकता है।
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