सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बार-बार किसी खास तरह का खाना खाने की इच्छा होना आम बात है, लेकिन लगातार होने वाली फूड क्रेविंग्स आपके खान-पान और जीवनशैली से जुड़े कुछ संकेत दे सकती हैं। मीठा, नमकीन या ज्यादा वसा वाले खाद्य पदार्थों की क्रेविंग केवल भूख की वजह से नहीं होती। तनाव, बोरियत और भावनात्मक स्थिति भी खाने की इच्छा को बढ़ा सकती है। अगर आपको बार-बार मीठा खाने की इच्छा होती है, तो सबसे पहले अपने भोजन और नींद के पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या भोजन में पर्याप्त संतुष्टि न मिलने से भी क्रेविंग बढ़ सकती है। वहीं नींद की कमी भूख और खाने की पसंद को प्रभावित कर सकती है।

नमकीन या तैलीय चीजों की इच्छा भी हमेशा किसी खास विटामिन या खनिज की कमी का प्रमाण नहीं होती। तनाव के दौरान कुछ लोगों में मीठे और वसायुक्त खाद्य पदार्थों की इच्छा बढ़ सकती है। इसलिए क्रेविंग को समझते समय तनाव, नींद और पूरे खान-पान को देखना जरूरी है। कुछ असामान्य चीजें खाने की लगातार इच्छा, जैसे बर्फ, कागज या चॉक जैसी गैर-खाद्य वस्तुएं खाने की इच्छा, पिका कहलाती है और यह आयरन की कमी से जुड़ी हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। अगर फूड क्रेविंग्स बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं, बार-बार ज्यादा खाने की स्थिति बनती है या खाने को लेकर नियंत्रण खोने जैसा महसूस होता है, तो डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। क्रेविंग को किसी बीमारी या पोषक तत्व की कमी का निश्चित संकेत मानकर खुद से सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।


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