सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इंसुलिन रेजिस्टेंस ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं। इससे ब्लड शुगर बढ़ने और आगे चलकर प्रीडायबिटीज या टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। अच्छी जीवनशैली अपनाकर इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार किया जा सकता है। नियमित व्यायाम इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद करता है। विशेषज्ञ दिशानिर्देशों के अनुसार सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि, जैसे तेज चलना, करना उपयोगी है। सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली कसरत भी की जा सकती है।
अगर वजन अधिक है तो शरीर के वजन में 5 से 7 प्रतिशत तक कमी भी ब्लड शुगर नियंत्रण और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। भोजन में बिना स्टार्च वाली सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, फल और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना तथा मीठे पेय और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करना उपयोगी है। नींद और तनाव पर ध्यान देना भी जरूरी है। अधिकांश वयस्कों को करीब 7 से 8 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त नींद, नियमित गतिविधि और तनाव प्रबंधन मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस को केवल घरेलू उपायों से स्वयं ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है, परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या वजन और कमर का आकार बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से जांच और व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर है।
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