सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कई लोग सोते समय अचानक बोलने, बड़बड़ाने या कुछ शब्द चिल्लाने लगते हैं। इस स्थिति को स्लीप टॉकिंग या सोम्निलोकी कहा जाता है। यह नींद से जुड़ी एक सामान्य स्थिति है और व्यक्ति को अक्सर सुबह याद भी नहीं रहता कि उसने रात में कुछ कहा था। शोध के अनुसार, जीवन में कई लोगों को कभी न कभी इसका अनुभव हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे एक ही कारण तय नहीं है। तनाव, नींद पूरी न होना, नींद के पैटर्न में बदलाव और कुछ अन्य पैरासोमनिया इसके साथ जुड़े हो सकते हैं। हालांकि केवल नींद में बोलने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि व्यक्ति किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित है। अधिकांश मामलों में यह नुकसानदायक नहीं होती।
लेकिन अगर बड़बड़ाने के साथ व्यक्ति चिल्लाने, जोर-जोर से हाथ-पैर चलाने, मारने या सपने को वास्तविक रूप में करने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। ऐसा व्यवहार REM स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर में देखा जा सकता है। यह कुछ मामलों में पार्किंसन रोग, लेवी बॉडी डिमेंशिया या मल्टीपल सिस्टम एट्रोफी जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से जुड़ा हो सकता है।
अगर नींद में बोलना लगातार हो रहा है, नींद खराब हो रही है, दिन में अत्यधिक नींद आती है या सोते समय खुद अथवा किसी अन्य को चोट लगने का खतरा है, तो स्लीप विशेषज्ञ या डॉक्टर से जांच कराना उचित है। नियमित नींद का समय, पर्याप्त नींद और सोने से पहले तनाव कम करना भी मददगार हो सकता है।
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