सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इलाज में कैसे होती है लूट, इससे कैसे बच सकते हैं आप?
बीमारी के समय मरीज और परिवार की प्राथमिकता इलाज होती है, लेकिन इसी स्थिति में अस्पताल के खर्च को लेकर कई लोग परेशान हो जाते हैं। जांच, दवाइयों, कमरे, डॉक्टर की फीस और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर बिल बढ़ सकता है। इसलिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले इलाज की अनुमानित लागत और जरूरी प्रक्रियाओं की जानकारी लेना जरूरी है।
मरीज या परिजन अस्पताल से इलाज का अनुमानित खर्च, कमरे का किराया, डॉक्टर की फीस, जांच और दवाओं के संभावित खर्च की जानकारी लिखित या डिजिटल रूप में मांग सकते हैं। किसी अतिरिक्त जांच या प्रक्रिया की जरूरत बताई जाए तो उसके कारण और अनुमानित शुल्क के बारे में पूछना भी उचित है।
दवाइयां खरीदते समय डॉक्टर की पर्ची के साथ जेनेरिक विकल्प और कीमत के बारे में जानकारी ली जा सकती है। अस्पताल से मिलने वाले बिल, जांच रिपोर्ट और दवाओं की रसीद संभालकर रखना चाहिए। यदि स्वास्थ्य बीमा है तो भर्ती से पहले बीमा कंपनी या टीपीए से अस्पताल के नेटवर्क और कवरेज की पुष्टि कर लेना उपयोगी है।
अगर बिल में ऐसी सेवा शामिल हो जिसे लेकर संदेह है, तो मरीज पहले अस्पताल के बिलिंग या शिकायत विभाग से स्पष्टीकरण मांग सकता है। जरूरत पड़ने पर संबंधित स्वास्थ्य प्राधिकरण, बीमा शिकायत व्यवस्था या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत की जा सकती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि गंभीर स्थिति में इलाज में देरी न करें, लेकिन संभव हो तो खर्च और उपचार की जानकारी पहले समझ लें। इलाज की हर प्रक्रिया, खर्च और दस्तावेज की जानकारी रखना मरीज के अधिकारों की रक्षा में मदद कर सकता है।
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