सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जहरीली हवा से बढ़ा आत्मघाती व्यवहार का जोखिम, रिसर्च में सामने आया संबंध

वायु प्रदूषण का असर केवल फेफड़ों और दिल तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसका संबंध मानसिक स्वास्थ्य से भी सामने आया है। ब्रिटेन की क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के शोधकर्ताओं ने 45 अध्ययनों की समीक्षा की है। इनमें से 29 अध्ययनों के आंकड़ों का मेटा-विश्लेषण किया गया। शोध में कुछ वायु प्रदूषकों और आत्महत्या, आत्महत्या के प्रयास तथा आत्मघाती विचारों के बीच संबंध पाया गया।

शोध के अनुसार, पीएम2.5 और पीएम10 जैसे बेहद छोटे प्रदूषक कणों के अल्पकालिक संपर्क तथा पीएम2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) के लंबे समय तक संपर्क का आत्मघाती व्यवहार के जोखिम से सांख्यिकीय संबंध मिला। सल्फर डाइऑक्साइड और ओजोन जैसे अन्य प्रदूषकों के मामले में भी संभावित संबंध के संकेत मिले हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक वायु प्रदूषण शरीर में सूजन और तंत्रिका तंत्र से जुड़े बदलावों से संबंधित हो सकता है, जो मूड और तनाव सहने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने शोध के निष्कर्षों को सावधानी से समझने की सलाह दी है। अध्ययन में शामिल अधिकांश शोध अवलोकनात्मक हैं, इसलिए यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्रदूषण सीधे आत्मघाती विचारों या प्रयासों का कारण बनता है। सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शहरी जीवन, आवास और स्वास्थ्य जैसे अन्य कारक भी भूमिका निभा सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा है कि मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम की रणनीतियों में पर्यावरणीय जोखिमों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। यह अध्ययन जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ में 15 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुआ है।


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