सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मिर्गी के लंबे समय तक चलने वाले दौरे यानी स्टेटस एपिलेप्टिकस के इलाज को लेकर AIIMS दिल्ली और जीबी पंत इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं की स्टडी में अहम जानकारी सामने आई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, मुंह में घुलने वाली क्लोबाजाम (Clobazam) लंबे दौरे को रोकने में नाक के जरिए दी जाने वाली मिडाजोलम (Midazolam) जितनी प्रभावी हो सकती है।
स्टडी में खास तौर पर ऐसे मरीजों पर ध्यान दिया गया जिनमें मिर्गी का दौरा लंबे समय तक जारी रहता है। शोधकर्ताओं ने क्लोबाजाम के असर और उसकी उपयोगिता की तुलना मिडाजोलम से की। इस अध्ययन के निष्कर्ष लंबे दौरे के दौरान वैकल्पिक उपचार विकल्पों पर आगे रिसर्च का रास्ता खोल सकते हैं।
क्लोबाजाम पहले से ही कुछ प्रकार की अनियंत्रित या दवा-प्रतिरोधी मिर्गी में सहायक दवा के तौर पर इस्तेमाल होती रही है। हालांकि, स्टेटस एपिलेप्टिकस में इसके इस्तेमाल को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं और विशेषज्ञों ने अधिक बड़े तथा नियंत्रित अध्ययनों की जरूरत बताई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक चलने वाला मिर्गी का दौरा मेडिकल इमरजेंसी हो सकता है। इसलिए ऐसे मरीज को डॉक्टर की निगरानी में तत्काल इलाज मिलना जरूरी है। क्लोबाजाम जैसी दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
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