सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कुत्ते और बिल्ली के काटने को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों के घाव और संक्रमण के जोखिम अलग हो सकते हैं। कुत्ते के काटने में गहरी चोट, ऊतक क्षति और गंभीर घाव का खतरा अधिक हो सकता है, जबकि बिल्ली के दांत पतले और नुकीले होने के कारण त्वचा में गहरा छेद कर सकते हैं। इससे बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। CDC के अनुसार, बिल्ली के काटने या खरोंच से संक्रमण हो सकता है और रिपोर्ट किए गए बिल्ली के काटने-खरोंच के 20-80% मामलों में संक्रमण की जानकारी सामने आई है।

दोनों जानवरों के काटने में रेबीज का जोखिम भी हो सकता है, खासकर जब जानवर अज्ञात, आवारा या बीमार हो और उसका टीकाकरण स्पष्ट न हो। रेबीज के संभावित संपर्क के बाद इलाज में देरी खतरनाक हो सकती है।

काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है। गहरा घाव, लगातार खून बहना, बढ़ती लालिमा या सूजन, तेज दर्द अथवा बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार रेबीज से बचाव, टिटनेस और संक्रमण के उपचार का निर्णय कर सकते हैं।


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