सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नींद और डिप्रेशन की दवाओं से बुजुर्गों में बढ़ सकता है गिरने का खतरा

उम्र बढ़ने के साथ गिरने का खतरा पहले ही बढ़ जाता है, लेकिन कुछ नींद और डिप्रेशन की दवाएं इस जोखिम को और बढ़ा सकती हैं। शोधों में पाया गया है कि कुछ एंटीडिप्रेसेंट और नींद की दवाओं के इस्तेमाल का बुजुर्गों में गिरने की घटनाओं से संबंध हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मरीज को इन दवाओं से समान खतरा होगा।

एक अध्ययन में 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में नींद की दवाएं लेने वालों में गिरने का जोखिम अधिक पाया गया। विशेष रूप से कुछ बेंजोडायजेपाइन और ट्राजोडोन जैसी दवाओं के साथ जोखिम अधिक देखा गया। शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि जिन लोगों को नींद की समस्या या दूसरी गंभीर स्वास्थ्य परेशानियां होती हैं, उनमें पहले से ही गिरने का खतरा अधिक हो सकता है।

एंटीडिप्रेसेंट दवाओं को लेकर भी अलग-अलग अध्ययनों में जोखिम सामने आया है। कुछ शोधों में SSRI और SNRI दवाओं के इस्तेमाल के साथ करीब 30% अधिक गिरने का जोखिम पाया गया, जबकि हाल के एक बड़े अध्ययन में कुछ पहली-पंक्ति एंटीडिप्रेसेंट्स के साथ चोट वाली गिरावट का जोखिम बिना इलाज वाले समूह से कम पाया गया। इससे स्पष्ट है कि दवा का चुनाव, मरीज की उम्र, अन्य दवाएं और स्वास्थ्य स्थिति सभी महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए बुजुर्ग मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना नींद या डिप्रेशन की दवा अचानक बंद नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर दवा की जरूरत, खुराक और दूसरे विकल्पों की समीक्षा कर सकते हैं।


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