सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : गर्भावस्था के दौरान फ्लू या H1N1 यानी स्वाइन फ्लू को हल्के में लेना मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। CDC के अनुसार, गर्भवती महिलाओं में इन्फ्लुएंजा के कारण गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक रहता है। संक्रमण के दौरान होने वाला तेज बुखार भी गर्भस्थ शिशु के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
H1N1 संक्रमण के दौरान गर्भवती महिला में निमोनिया, सांस लेने में परेशानी और गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए गर्भावस्था में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द या सांस संबंधी परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी है। पुराने H1N1 दिशानिर्देशों में भी गर्भवती महिलाओं को लक्षण आने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की बात कही गई है। फ्लू से बचाव के लिए गर्भावस्था में इंजेक्टेबल फ्लू वैक्सीन की सिफारिश की जाती है। CDC के अनुसार इसे गर्भावस्था के किसी भी चरण में दिया जा सकता है और टीकाकरण मां के साथ जन्म के बाद शुरुआती महीनों में शिशु को भी सुरक्षा देने में मदद करता है।
नोट: गर्भावस्था में फ्लू के लक्षण होने पर खुद से दवा न लें। उपचार और एंटीवायरल दवा डॉक्टर की सलाह से ही लें।
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