सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अगर ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में 25-hydroxy vitamin D का स्तर 20 ng/mL से कम आया है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। भारत के विशेषज्ञों के consensus के अनुसार 20 ng/mL से नीचे का स्तर विटामिन-D की कमी माना जाता है, जबकि 10 ng/mL से कम स्तर को गंभीर कमी की श्रेणी में रखा गया है।
विटामिन-D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। कमी होने पर कई लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन कुछ लोगों को हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, थकान और लंबे समय तक रहने पर हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर स्थिति का आकलन नहीं किया जाना चाहिए।
इलाज मरीज की उम्र, विटामिन-D के स्तर, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करता है। भारतीय विशेषज्ञों के consensus में वयस्कों में deficiency के लिए चिकित्सकीय निगरानी में cholecalciferol (Vitamin D3) 60,000 IU सप्ताह में एक बार 12 सप्ताह तक देने की सिफारिश की गई है, जिसके बाद maintenance dose की जरूरत हो सकती है।
हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के हाई-डोज विटामिन-D लेना उचित नहीं है। जरूरत से ज्यादा सेवन से toxicity और कैल्शियम बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। रिपोर्ट कम आने पर डॉक्टर से सलाह लेकर उचित डोज और फॉलो-अप टेस्ट तय करना बेहतर है।
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