सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत में हृदय रोग (CVDs) गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में होने वाली कुल मौतों में करीब 27 प्रतिशत का संबंध हृदय एवं रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों से है। मानसून के दौरान मौसम में बदलाव, संक्रमण, उमस और दिनचर्या में बदलाव हृदय रोगियों के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकते हैं।
मानसून में हृदय रोगियों को इन 7 जोखिमों से रहना चाहिए सावधान:
1. अचानक मौसम में बदलाव: तापमान और नमी में बदलाव रक्तचाप तथा हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
2. संक्रमण का खतरा: मानसून में वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण बढ़ सकते हैं, जिससे हृदय रोगियों पर अतिरिक्त तनाव पड़ सकता है।
3. शारीरिक गतिविधि कम होना: लगातार बारिश के कारण वॉक या व्यायाम का रूटीन प्रभावित हो सकता है, जिससे वजन और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है।
4. अस्वास्थ्यकर खान-पान: बारिश के मौसम में तला-भुना और अधिक नमक वाला भोजन बढ़ सकता है, जो हृदय रोगियों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
5. डिहाइड्रेशन: उमस के बावजूद पर्याप्त पानी न पीना शरीर में पानी की कमी पैदा कर सकता है और स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
6. दवाओं में लापरवाही: मौसम या दिनचर्या बदलने के कारण दवाएं समय पर न लेना हृदय रोगियों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।
7. तनाव और नींद की कमी: लगातार बारिश, घर में सीमित रहना और दिनचर्या में बदलाव तनाव तथा नींद की समस्या बढ़ा सकते हैं।
हृदय रोगियों को मानसून में दवाएं नियमित रूप से लेने, संतुलित भोजन करने, पर्याप्त पानी पीने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्यायाम करने पर ध्यान देना चाहिए। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या अचानक पसीना आने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
Hashtags: #Health #Bhopal #Desksource #एनएन #टवर #आईट #DeskSource #Cvds #बदल #रमण