सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं स्टैटिन को लेकर एक नए लंबे अध्ययन में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। डेनमार्क में किए गए 15 साल के एक अध्ययन के अनुसार, स्टैटिन का सेवन करने वाले लोगों में डिमेंशिया विकसित होने का जोखिम कम देखा गया। खास तौर पर जिन लोगों ने उपचार अपेक्षाकृत जल्दी शुरू किया, उनमें अगले 10 वर्षों में डिमेंशिया का जोखिम करीब 15 प्रतिशत कम पाया गया।

अध्ययन में टाइप-2 डायबिटीज वाले 1,32,000 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि अध्ययन अवधि के दौरान स्टैटिन शुरू करने वाले लोगों में डिमेंशिया का जोखिम लगभग 10 प्रतिशत कम था, जबकि अपेक्षाकृत जल्दी स्टैटिन लेने वालों में यह कमी 15 प्रतिशत तक रही। पुरुषों और महिलाओं में परिणाम लगभग समान बताए गए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, स्टैटिन शरीर में LDL यानी ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल को कम करती हैं। अधिक LDL कोलेस्ट्रॉल रक्त वाहिकाओं में प्लाक बनने का कारण बन सकता है, जिससे मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह प्रभावित होने और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। यही प्रक्रिया डिमेंशिया के जोखिम से भी जुड़ी हो सकती है।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह ऑब्जर्वेशनल अध्ययन है। इसलिए इससे यह साबित नहीं होता कि स्टैटिन सीधे तौर पर डिमेंशिया को रोकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, स्टैटिन और डिमेंशिया के बीच संबंध को बेहतर ढंग से समझने के लिए आगे और शोध की जरूरत है।

स्टैटिन मुख्य रूप से हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए डॉक्टरों द्वारा दी जाती हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी व्यक्ति को स्टैटिन शुरू करने या बंद करने का फैसला स्वयं नहीं लेना चाहिए, बल्कि डॉक्टर से परामर्श के बाद ही उपचार संबंधी निर्णय करना चाहिए।


Hashtags: #Health #Bhopal #Desksource #खतर #ययन #एनएन #DeskSource #टवर #आईट #करन