सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वजन कम करने और टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली GLP-1 दवाओं को लेकर वैज्ञानिकों की दिलचस्पी अब कई दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों में भी बढ़ रही है। सेमाग्लूटाइड और इसी वर्ग की अन्य दवाओं पर हुए अध्ययनों में हृदय, किडनी, लिवर और नींद से जुड़ी कुछ बीमारियों में संभावित फायदे के संकेत मिले हैं। हालांकि इनमें से कई उपयोग अभी शोध के स्तर पर हैं और हर बीमारी के इलाज के लिए इन दवाओं को मंजूरी नहीं मिली है।

GLP-1 दवाएं शरीर में भूख और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन के प्रभाव की नकल करती हैं। इनके कारण भूख कम हो सकती है, पेट खाली होने की प्रक्रिया धीमी होती है और ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद मिलती है। इसी वजह से मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज के उपचार में इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

शोध में हृदय रोग और किडनी से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को कम करने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा मेटाबॉलिक फैटी लिवर डिजीज, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों में भी इनके संभावित लाभों का अध्ययन किया जा रहा है।

हाल में GLP-1 आधारित दवाओं के हृदय संबंधी लाभों को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अमेरिका में Mounjaro यानी टिरजेपाटाइड को टाइप-2 डायबिटीज और उच्च हृदय जोखिम वाले वयस्कों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम कम करने के लिए मंजूरी मिली है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि GLP-1 दवाओं का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह और उचित चिकित्सकीय निगरानी में किया जाना चाहिए। हर संभावित बीमारी के लिए इनका प्रभाव और सुरक्षा अभी समान रूप से स्थापित नहीं है। इसलिए इन्हें केवल वजन घटाने के लिए स्वयं से लेना उचित नहीं है।


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