सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : क्या फ्लू या कोरोना जैसे श्वसन संक्रमण शरीर में लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी कैंसर कोशिकाओं को दोबारा सक्रिय कर सकते हैं? हालिया प्रयोगात्मक शोध ने इस सवाल को लेकर नई चिंता और वैज्ञानिक चर्चा पैदा की है। शोध में संकेत मिले हैं कि श्वसन वायरस से होने वाली सूजन कुछ परिस्थितियों में पहले से मौजूद निष्क्रिय कैंसर कोशिकाओं को दोबारा बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है। हालांकि, अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि श्वसन संक्रमण इंसानों में कैंसर की वापसी का कारण बनते हैं।

चूहों पर किए गए प्रयोग में सामने आया संकेत शोध में इन्फ्लुएंजा A वायरस और SARS-CoV-2 के प्रभावों का अध्ययन किया गया। प्रयोगों में पाया गया कि फेफड़ों में मौजूद निष्क्रिय स्तन कैंसर कोशिकाओं ने संक्रमण के बाद दोबारा विभाजित होना शुरू किया। कुछ मॉडल में संक्रमण के बाद कैंसर कोशिकाओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

सूजन की भूमिका अहम वैज्ञानिकों ने इंटरल्यूकिन-6 यानी IL-6 को इस प्रक्रिया में संभावित महत्वपूर्ण कारक पाया। संक्रमण के दौरान शरीर में पैदा होने वाली सूजन और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कैंसर कोशिकाओं के उस वातावरण को बदल सकती है, जो उन्हें लंबे समय तक निष्क्रिय बनाए रखता है।हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में केवल IL-6 ही जिम्मेदार नहीं हो सकता। प्रतिरक्षा कोशिकाओं, रक्त वाहिकाओं, ऊतक संरचना और अन्य जैविक प्रक्रियाओं की भी भूमिका हो सकती है।

क्या कैंसर मरीजों को ज्यादा निगरानी की जरूरत है? फिलहाल ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिसके आधार पर फ्लू या कोविड संक्रमण के बाद कैंसर से ठीक हो चुके लोगों की नियमित निगरानी में बदलाव किया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार केवल श्वसन संक्रमण होने के कारण अतिरिक्त स्कैन, IL-6 टेस्ट या कैंसर की विशेष जांच शुरू करने की सलाह अभी समर्थित नहीं है।

इंसानों में अभी स्पष्ट प्रमाण नहीं शोध से जुड़े निष्कर्ष मुख्य रूप से प्रयोगशाला और चूहों पर किए गए प्रयोगों से सामने आए हैं। कुछ मानव अध्ययनों में श्वसन संक्रमण और कैंसर के खराब परिणामों के बीच संबंध जरूर देखा गया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि संक्रमण सीधे कैंसर की वापसी का कारण बनता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस संबंध को समझने के लिए बड़े और लंबे समय तक चलने वाले मानव अध्ययनों की जरूरत है। इसलिए अभी इसे कैंसर के दोबारा लौटने का स्थापित कारण नहीं माना जा सकता।


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