सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पश्चिम बंगाल में डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्कूलों के ड्रेस कोड में अस्थायी बदलाव की तैयारी है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने स्कूलों से अपील की है कि सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के दौरान छात्रों को ऐसे कपड़े पहनने की अनुमति दी जाए, जिनसे शरीर का ज्यादा हिस्सा ढका रहे।
लड़कों को फुल पैंट और फुल स्लीव शर्ट की सलाह स्वास्थ्य मंत्री के सुझाव के मुताबिक लड़कों को पूरी बाजू की शर्ट और फुल पैंट पहनने की अनुमति दी जानी चाहिए। वहीं, जिन छात्राओं की स्कूल यूनिफॉर्म में स्कर्ट शामिल है, उन्हें पैर पूरी तरह ढकने वाले कपड़े, जैसे सलवार-सूट, पहनने की अनुमति देने की अपील की गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों के लिए इन अस्थायी बदलावों को लेकर आधिकारिक सर्कुलर जारी किए जाने की उम्मीद है। राज्य सरकार निजी स्कूलों से भी इसी तरह के एहतियाती कदम उठाने का अनुरोध करेगी, हालांकि निजी संस्थानों में अंतिम फैसला संबंधित स्कूल बोर्ड का होगा।
मोजे पहनना पर्याप्त नहीं, मंत्री ने समझाया कारण स्वास्थ्य मंत्री ने घुटने तक के मोजे पहनाने के सुझाव को पर्याप्त नहीं माना। उनका कहना है कि ऐसे मोजे त्वचा से चिपके रहते हैं और पतले होने के कारण मच्छर उनके जरिए भी काट सकता है। इसलिए केवल मोजों पर निर्भर रहने के बजाय शरीर को अधिक से अधिक ढकने वाले कपड़ों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
डेंगू के पीक सीजन को देखते हुए फैसला स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में जुलाई से दिसंबर के बीच डेंगू के अधिक फैलने की आशंका वाले समय को लेकर कई एहतियाती उपायों पर चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्री ने शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और प्रधानाचार्यों से विशेष रूप से सितंबर से नवंबर तक छात्रों को पूरी बाजू और शरीर ढकने वाले कपड़े पहनने की अनुमति देने की अपील की है।
इस बीच, पश्चिम बंगाल में डेंगू की स्थिति पर सरकार लगातार निगरानी कर रही है। राज्य सरकार के अनुसार इस साल अब तक डेंगू के मामले पिछले वर्ष की तुलना में कम हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने नवंबर तक निगरानी और रोकथाम के उपाय जारी रखने को कहा है। स्कूल ड्रेस में यह बदलाव स्थायी नहीं होगा। इसका उद्देश्य डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के काटने से छात्रों को अधिक सुरक्षा देना है। हालांकि, डेंगू की रोकथाम के लिए कपड़ों के साथ-साथ मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय भी जरूरी हैं।
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