सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : प्रकृति और इंसान की सेहत के बीच गहरा संबंध माना जाता है। शोधों से संकेत मिलता है कि प्राकृतिक वातावरण और जैव विविधता के संपर्क में कमी का संबंध प्रतिरक्षा तंत्र के असंतुलन तथा कुछ इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते जोखिम से हो सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, प्राकृतिक वातावरण में मौजूद विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवों के संपर्क से मानव प्रतिरक्षा तंत्र के विकास और नियमन में भूमिका हो सकती है। खासतौर पर बचपन में विविध प्राकृतिक वातावरण से संपर्क प्रतिरक्षा प्रणाली को सही तरीके से विकसित करने में मदद कर सकता है।

शहरीकरण और प्राकृतिक क्षेत्रों से बढ़ती दूरी के कारण लोगों का पौधों, मिट्टी और प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों की विविधता से संपर्क कम हो रहा है। कुछ अध्ययनों में प्राकृतिक वातावरण से कम संपर्क को अस्थमा, एलर्जी और अन्य इम्यून-मीडिएटेड बीमारियों के जोखिम से जोड़ा गया है। हालांकि, इन बीमारियों के पीछे आनुवंशिक और कई अन्य पर्यावरणीय कारण भी होते हैं, इसलिए केवल प्रकृति से कम संपर्क को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।

शोधों की समीक्षा में यह भी पाया गया है कि प्रकृति के संपर्क का प्रतिरक्षा स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिसमें सूजन कम करने और कुछ प्रतिरक्षा कोशिकाओं की गतिविधि से जुड़े प्रभाव शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में हरित क्षेत्रों और जैव विविधता को बढ़ावा देना न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, प्रकृति से संपर्क और इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारियों के बीच संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।


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