सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : PCOS है तो क्या मां बनने में होगी दिक्कत? जानें कब करानी चाहिए फर्टिलिटी जांच

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्थिति है। अनियमित पीरियड्स, हार्मोनल बदलाव और ओव्यूलेशन में परेशानी के कारण कुछ महिलाओं को गर्भधारण करने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है। लेकिन PCOS को बांझपन का पर्याय मानना सही नहीं है। उचित जांच और उपचार के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं सफलतापूर्वक गर्भधारण कर सकती हैं।

PCOS में गर्भधारण में क्यों आती है परेशानी? PCOS में सबसे बड़ी समस्या अनियमित या कम ओव्यूलेशन हो सकती है। यदि हर महीने अंडा रिलीज नहीं होता, तो गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है। इसके अलावा वजन बढ़ना, इंसुलिन से जुड़ी समस्याएं और अन्य हार्मोनल बदलाव भी प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। PCOS वाली महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान कुछ जोखिम भी बढ़ सकते हैं, इसलिए गर्भधारण से पहले स्वास्थ्य और मेटाबॉलिक स्थिति की समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है।

PCOS है तो कब करानी चाहिए फर्टिलिटी जांच? हर महिला को PCOS की वजह से तुरंत फर्टिलिटी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। सामान्य तौर पर, 35 वर्ष से कम उम्र की महिला में नियमित असुरक्षित संबंधों के बावजूद 12 महीने तक गर्भधारण न होने पर फर्टिलिटी मूल्यांकन शुरू किया जाता है। 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में यह जांच 6 महीने बाद शुरू करने की सलाह दी जाती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र में इससे भी पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है। हालांकि PCOS के साथ पीरियड्स बहुत अनियमित हैं या डॉक्टर को पहले से ऐसी स्थिति का संदेह है जो प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है, तो 6 या 12 महीने इंतजार करना जरूरी नहीं है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर पहले ही फर्टिलिटी मूल्यांकन शुरू कर सकते हैं।

इलाज से गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है यदि जांच में PCOS के कारण ओव्यूलेशन की समस्या सामने आती है और कोई अन्य बांझपन कारक नहीं है, तो डॉक्टर ओव्यूलेशन बढ़ाने के लिए दवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय PCOS गाइडलाइन के अनुसार, ऐसे मामलों में लेट्रोजोल पहली पंक्ति का फार्माकोलॉजिकल उपचार है। उपचार का चुनाव महिला की उम्र, स्वास्थ्य, ओव्यूलेशन, वजन, अन्य प्रजनन कारकों और पार्टनर की जांच के आधार पर किया जाता है। सिर्फ महिला की जांच जरूरी नहीं फर्टिलिटी की समस्या होने पर केवल महिला को जिम्मेदार मानना सही नहीं है। मूल्यांकन में पुरुष पार्टनर की प्रजनन क्षमता की जांच भी महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञ दिशानिर्देश पुरुष और महिला दोनों से जुड़े संभावित कारकों को ध्यान में रखकर जांच की सलाह देते हैं।

इसलिए PCOS की जानकारी मिलने पर घबराने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर है। PCOS होने का मतलब यह नहीं कि मां बनना संभव नहीं है, लेकिन अगर पीरियड्स लंबे समय तक अनियमित हैं या गर्भधारण में परेशानी हो रही है, तो समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना महत्वपूर्ण है।


Hashtags: #Health #Bhopal #Desksource #Pcos #बनन #एनएन #DeskSource #टवर #आईट #ओवर