प्रदूषण बढ़ा सकता है डायबिटीज का खतरा, घर में बैठे रहना भी नुकसानदेह
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल:
वायु प्रदूषण का असर अब केवल फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारियों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद बेहद सूक्ष्म पीएम 2.5 कण शरीर के मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर नियंत्रण को भी प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, प्रदूषण से बचने के लिए लगातार घर में रहना और शारीरिक गतिविधियां कम कर देना भी ब्लड शुगर के नियंत्रण को मुश्किल बना सकता है।
एम्स दिल्ली के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश खड्गावत के अनुसार, प्रदूषण सीधे तौर पर हर व्यक्ति में डायबिटीज पैदा नहीं करता, लेकिन इसके कारण बदलने वाली जीवनशैली जोखिम बढ़ा सकती है। प्रदूषण के दिनों में लोग सुबह की सैर और व्यायाम बंद कर देते हैं। इससे कैलोरी खर्च कम होता है, वजन बढ़ने की आशंका रहती है और शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है। घर में अधिक समय बिताने के दौरान बार-बार स्नैक्स खाने की आदत भी वजन और शुगर पर असर डाल सकती है।
पीएम 2.5 कैसे प्रभावित करता है ब्लड शुगर?
दिल्ली और चेन्नई में 12,064 लोगों पर किए गए एक भारतीय अध्ययन में पीएम 2.5 के लंबे समय तक संपर्क और टाइप-2 डायबिटीज के बीच संबंध पाया गया। अध्ययन के मुताबिक, वार्षिक औसत पीएम 2.5 में प्रत्येक 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि के साथ टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम लगभग 22 प्रतिशत अधिक पाया गया। प्रदूषण से शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने की आशंका भी रहती है, जो इंसुलिन के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
घर में रहकर भी रखें सक्रियता
विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रदूषण अधिक होने पर बाहर व्यायाम करने से बचें, लेकिन शारीरिक गतिविधियां पूरी तरह बंद न करें। घर के भीतर योग, हल्की एक्सरसाइज और वॉकिंग की जा सकती है। संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और वजन पर नियंत्रण भी जरूरी है। डायबिटीज या प्रीडायबिटीज से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए।
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