दिल्ली और लखनऊ में बच्चों की अचानक मौत, दिल की सेहत पर बढ़ी चिंता
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल:
देश में स्कूली बच्चों की अचानक मौत की दो घटनाओं ने कम उम्र में दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली के मयूर विहार में 9 साल की बच्ची की स्कूल में अचानक बेहोश होकर गिरने के बाद मौत हो गई। वहीं, लखनऊ में 13 साल का कक्षा आठवीं का छात्र स्कूल पहुंचने के कुछ ही देर बाद कक्षा में गिर पड़ा। अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। दोनों मामलों में कार्डियक अरेस्ट की आशंका जताई गई है। हालांकि, मौत के सटीक कारणों की पुष्टि मेडिकल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगी।
कम उम्र में क्यों बढ़ रहा खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों में अचानक कार्डियक अरेस्ट के पीछे केवल खराब जीवनशैली ही जिम्मेदार नहीं होती। कई बार जन्मजात हृदय रोग, दिल की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी और आनुवंशिक कारणों से दिल की धड़कन नियंत्रित करने वाली विद्युत प्रणाली में गड़बड़ी हो सकती है। ऐसी स्थितियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती हैं।
इसके अलावा, शारीरिक गतिविधियों में कमी, मोटापा, जंक फूड और अधिक समय तक मोबाइल-टीवी के सामने बैठे रहने से बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ये स्थितियां भी भविष्य में हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज
खेलते या दौड़ते समय बेहोशी, सीने में दर्द, असामान्य सांस फूलना, दिल की तेज या अनियमित धड़कन और बार-बार चक्कर आना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। परिवार में कम उम्र में अचानक मौत या आनुवंशिक हृदय रोग का इतिहास होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। जरूरत के अनुसार ईसीजी और इकोकार्डियोग्राफी जैसी जांच कराई जा सकती हैं।
स्कूलों में आपातकालीन व्यवस्था जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों को सीपीआर का प्रशिक्षण मिलना चाहिए। साथ ही प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और जरूरत के अनुसार ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी) उपलब्ध होना चाहिए। किसी बच्चे के अचानक गिरने और सामान्य सांस न लेने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाकर सीपीआर शुरू करना जरूरी है।
डॉक्टरों के अनुसार, इन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी बच्चों में हृदय रोग बढ़ रहा है। हालांकि, लक्षणों की समय पर पहचान, जोखिम वाले बच्चों की जांच और स्कूलों में बेहतर आपातकालीन तैयारी से गंभीर स्थितियों में मदद मिल सकती है।
Hashtags: #Health #Bhopal #दिल्ली #लखनऊ #बच्चों #अचानक #मौत #दिल #सेहत #दिल्लीऔरलखनऊमें