सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ ही लोग खानपान में तेल और घी का इस्तेमाल कम करने लगे हैं। कई लोगों का मानना है कि घी वजन और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है, इसलिए इसे पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। लेकिन लिवर विशेषज्ञ और इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस), दिल्ली के निदेशक डॉ. शिव कुमार सरीन का कहना है कि घी को पूरी तरह खराब मानना सही नहीं है। जरूरत इस बात की है कि इसका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए और रोजाना ली जाने वाली कुल कैलोरी का ध्यान रखा जाए।
हेल्थ-वेल्थ समिट में डॉ. सरीन ने कहा कि घर का खाना बेहतर विकल्प है, लेकिन घर में बनने वाला हर व्यंजन अपने आप हेल्दी नहीं हो जाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भोजन में तीन से चार चम्मच घी होने का मतलब यह नहीं है कि खाना नुकसानदायक है। हालांकि, इसके साथ शारीरिक गतिविधि और कैलोरी खर्च का संतुलन भी जरूरी है।
कैलोरी का हिसाब रखना जरूरी
डॉ. सरीन के मुताबिक, शरीर में जितनी कैलोरी ली जा रही है, उसके अनुरूप शारीरिक गतिविधि भी होनी चाहिए। जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने और व्यायाम नहीं करने पर वजन बढ़ सकता है तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। घी में कैलोरी के साथ सैचुरेटेड फैट भी होता है, इसलिए इसकी मात्रा व्यक्ति की डाइट और स्वास्थ्य के अनुसार तय होनी चाहिए।
हर व्यक्ति के लिए चार चम्मच सही नहीं
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय पोषण संस्थान के आहार संबंधी दिशा-निर्देशों में घी या मक्खन को सीमित रखने की सलाह दी गई है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सैचुरेटेड फैट का सेवन कम रखने पर जोर देता है। अधिक कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग या वजन संबंधी समस्या वाले लोगों को डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार घी की मात्रा तय करनी चाहिए।
विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है कि सेहतमंद खानपान का मतलब किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह छोड़ना नहीं, बल्कि संतुलित भोजन, सीमित मात्रा और नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवनशैली का हिस्सा बनाना है।
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