सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : महाराष्ट्र के 22 महीने के बच्चे वेदांश सिंह को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 नाम की दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। यह एक गंभीर न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली मोटर न्यूरॉन्स प्रभावित होती हैं। इसके कारण बच्चों में मांसपेशियों की कमजोरी, शरीर में ढीलापन, बैठने-खड़े होने में परेशानी और गंभीर मामलों में निगलने तथा सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।

वेदांश के इलाज के लिए जीन थेरेपी की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उसके उपचार का खर्च करीब 9 करोड़ रुपये है। परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना मुश्किल था। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मयूरेश गुजर और उनकी टीम ने करीब एक महीने तक अभियान चलाकर इलाज के लिए धन जुटाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान के दौरान करीब 2.22 करोड़ रुपये जुटाए गए और अनंत अंबानी ने बच्चे के इलाज का खर्च उठाने का आश्वासन दिया।

SMA की कुछ जीन-आधारित थैरेपी बेहद महंगी हैं। भारत सरकार के दुर्लभ रोग संबंधी दस्तावेज में जॉल्जेन्स्मा जैसी जीन थेरेपी की अनुमानित लागत करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसकी ऊंची कीमत के पीछे जीन थेरेपी के विकास और निर्माण की भारी लागत, सीमित रोगी संख्या तथा उपचार की जटिलता जैसे कारण बताए जाते हैं। हालांकि, इलाज की उपयुक्तता बच्चे की उम्र, बीमारी के प्रकार और चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करती है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह जरूरी है।


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